‘उमर खालिदको मिला मुसलमान होनेका दण्ड’, कन्हैयाको कांग्रेसमें सम्मिलित, कारागृहमें बन्द ‘दंगाई’के लिए कट्टरपन्थियोंको हुई पीडा


२८ सितम्बर, २०२१
       कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवानीद्वारा कांग्रेसका हाथ थामे जानेकी चर्चाओंके मध्य ‘सोशल मीडिया’पर एक नूतन विवाद आरम्भ हो गया है । ‘इस्लामी’ कट्टरपन्थी इस चर्चामें उमर खालिदके लिए अपना दुःख प्रकट कर रहे हैं ।
       आरफा खानुम शेरवानी कन्हैया कुमारको प्रतिभाशाली नेता तो कहती हैं और साथ ही इस बातपर भी दुःख भी प्रकट करती है कि इससे उमर खालिदकी सहायता नहीं होगी, जो कि उनके चमकते सितारे हैं और कारागृहमें हैं । वह पूछती हैं कि क्या उन्हें मुसलमान होनेका दण्ड दिया जा रहा है ?
       अफजल लिखता है, “मुसलमान होनेका दण्ड भोग रहे उमर खालिद, क्या कन्हैया कुमार कांग्रेसमें आएंगे और उन्हें कारागृहसे बाहर निकालेंगे ?”
       ज्ञातव्य है कि जिस उमर खालिदके प्रतिभूति (जमानत) और उसके राजनीतिक जीवनपर ‘इस्लामी’ कट्टरपन्थी चर्चा कर रहे हैं । उसे गत वर्ष १४ सितम्बरको बन्दी बनाया गया था, वे भी उत्तर पूर्वी देहलीमें भडकी हिंसाकी घटना में । खालिदपर ट्रंपके भारत ‘दौरे’के मध्य हिंसाका षड्यन्त्र रचनेका आरोप है । इसके अतिरिक्त, कई ‘इस्लामी’ और उनके शुभचिन्तक ये दिखा रहे हैं कि कन्हैया कुमार, जिग्नेश मेवानी सब एक ही जैसे थे; परन्तु उमर खालिदको प्रताडित किया जा रहा है; क्योंकि वह मुसलमान है ।
      भारतमें मुसलमान, राष्ट्रपति पदतक पहुंचे हैं और आज भी शासकीय सुविधाओंका सर्वाधिक लाभ ले रहे हैं, ऐसेमें यह आरोप लगाना कि मुसलमान प्रताडित हो रहे हैं, यह हिन्दुओंकी सहानुभूति प्राप्त करनेका प्रपंच मात्र है, जिससे सतर्क रहनेकी आवश्यकता है ।  – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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