‘टीएमसी’के गुण्डोंद्वारा पिटाई किए जानेके पश्चात, हुई थी ‘भाजपा’ नेता मानस साहाकी मृत्यु, अब मुख्यमन्त्री ममता बनर्जीने ‘मरे हुए कुत्ते’से की उनकी तुलना
२५ सितम्बर, २०२१
बंगालकी मुख्यमन्त्री ममता बनर्जी शुक्रवारको (२४ सितम्बर २०२१) भवानीपुरमें चुनाव प्रचारके मध्य ‘भाजपा’ नेता मानस साहाकी तुलना ‘मरे हुए कुत्ते’से करती दिखीं । बनर्जीने कहा, “कल जब मैं एक बैठकके लिए गई हुई थी, तब मैंने सुना कि वे (भाजपा कार्यकर्ता) एक शवके साथ मेरे आवासमें प्रवेश करनेका प्रयास कर रहे थे । उनका इतना साहस कि यह सब मेरे घरके सामने करें ।”
उन्होंने ‘बीजेपी’की राज्य ईकाईको धमकी देते हुए कहा, “यदि मैं आपके घर एक मरा हुआ कुत्ता भेज दूं, तो क्या होगा ? क्या आपको नहीं लगता कि मेरे पास आवश्यक शक्तिबल (जनशक्ति) है ? एक सडे हुए कुत्तेको आपके घरके बाहर फेंकनेमें मुझे एक सैकेण्डका समय लगेगा और आप १० दिनोंतक (गन्धके कारण) खा नहीं पाएंगे ।”
‘भाजपा’के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदारने बंगालकी मुख्यमन्त्रीकी ‘असंवेदनशील’ टिप्पणीके लिए उनकी आलोचना की है । उन्होंने कहा, “यह एक संवेदनशील मुख्यमन्त्रीके शब्द नहीं हो सकते ।”
ज्ञातव्य है कि मृतक ‘भाजपा’ नेता मानस साहाने २०२१ में बंगाल चुनावोंके मध्य दक्षिण २४ परगना जनपदके मगराहाट पश्चिम विधानसभा क्षेत्रसे चुनाव लडा था । वह अपने प्रतिद्वन्द्वी ‘टीएमसी’ नेता जियास उद्दीन मोल्लासे १८,४१० मतोंसे पराजित हो गए थे । कथित रूपसे, २ मईको (मतगणनाके दिन) ‘टीएमसी’के गुण्डोंने साहाको निर्दयतासे पीटा था । इस आक्रमणमें वह गम्भीर रूपसे चोटिल हो गए । दीर्घ कालतक उपचारके पश्चात, उन्होंने २२ सितम्बर २०२१ को प्राण त्याग दिए थे ।
बंगाल चुनावमें हुए उपद्रव और उसमें ‘टीएमसी’के गुण्डोंद्वारा ‘भाजपा’ नेताओंकी निर्दयतासे की गई हत्याएं (जिनकी अभी जांच चल रही है), मुख्यमन्त्री ममता बनर्जीके ‘तानाशाही’ कार्यशैलीका प्रमाण है । चुनावमें लोकतन्त्रका महत्त्व शून्य रह गया है, यदि आप जनमानसका मत प्राप्त नहीं कर सकते, तो प्रतिद्वन्द्वीको मार देना चाहिए, इसप्रकारकी राजनीतिका प्रचलन अब ममता शासनमें सर्वत्र दिखाई दे रहा है । ऐसे दल और ऐसे राजनेताओंका शीघ्र ही सर्वनाश होना चाहिए, जिससे भारतमें पुनः मुगल राज न स्थापित होने पाए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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