महंत नरेंद्र गिरिके पश्चात अब अयोध्यामें साधु मणिराम दासकी सन्दिग्ध परिस्थितियोंमें मृत्यु, मन्दिरके तीसरे तलसे गिरे नीचे
२२ सितम्बर, २०२१
अखिल भारतीय अखाडा परिषदके अध्यक्ष महन्त नरेंद्र गिरिकी मृत्युको अधिक दिन भी नहीं व्यतीत हुए थे कि अब अयोध्यामें एक साधुकी सन्दिग्ध परिस्थितियोंमें छतसे नीचे गिरनेके कारण मृत्यु हो गई है । मृतक साधुका अभिज्ञान (पहचान) मणिराम दासके रूपमें हुआ है । वह श्रीराम मन्त्रार्थ मण्डपम मन्दिरके तीसरे तलसे नीचे गिर गए थे । ‘पुलिस’ उनकी मृत्युके कारणोंकी जांच कर रही है ।
विवरणके अनुसार, तीसरे तलसे नीचे गिरनेके कारण उनकी मृत्यु हुई है । ‘पुलिस’ने उनके शवको अधिकारमें लेकर अन्त्यपरीक्षणके (पोस्टमार्टमके) लिए भेजा है । उन्होंने आत्महत्या की है या उनकी हत्या हुई है । ‘पुलिस’ दोनों दृष्टिकोणसे घटनाकी जांच कर रही है । बताया जा रहा है कि मृत्युसे पूर्व, गत कुछ दिनसे मणिरामने लोगोंसे वार्तालाप अल्प कर दिया था । वह एकाकी रहा करते थे और अत्यन्त अल्प ही बाहर निकला करते थे । उन्हें किसी बातकी व्याकुलता थी या नहीं, उन्होंने किसीसे भी इसकी चर्चातक नहीं की थी ।
आरम्भिक जांचमें सामने आया है कि मृतक साधु मणिराम गत कुछ समयसे तनावमें जी रहे थे; यद्यपि, ऐसा किन कारणोंसे था ? यह स्पष्ट नहीं हो सका है । ‘पुलिस’ प्रशासन, मृतक साधुके दूरभाष (फोन) क्रमाङ्कोंके ब्यौरेको खङ्गालनेमें जुट गया है । इसके साथ ही मन्दिर प्रशासन समेत दूसरे साधुओंसे पूछताछ की जा रही है ।
एकके पश्चात एक महन्त साधुओंकी हत्या या आत्महत्या दर्शाती है कि स्थिति चिन्तनीय है । भारत देशमें यदि साधु-महात्माओंकी इस प्रकार गति होने लगे, तो समझना चाहिए कि विकराल सङ्कट आनेको है; अतः शासनको इस प्रकरणकी गहराईसे जांच करवानी चाहिए एवं कोई दोषी पाया जाए, तो उसे मृत्यु दण्ड दिया जाना चाहिए । ऐसी घटनाएं भारत देशके हित में नही है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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