श्रीदत्तात्रेय देवता पीठके गर्भगृहमें केवल मुसलमान ‘फकीर’ ही जाएगा, उच्च न्यायालयने परिवर्तित किया, कांग्रेस शासनका आदेश


२९ सितम्बर, २०२१
      जनपद चिकमंगलुरुमें स्थित गुरु दत्तात्रेय देवता पीठ एवं बाबा बुदनगिरि दरगाह विवादसे जुडे विषयमें २८ सितम्बर, मंगलवारको कर्नाटक उच्च न्यायालयने एक महत्त्वपूर्ण आदेशमें कांग्रेस शासनके १९ मार्च, २०१८ को दिए उस आदेशको समाप्त कर दिया,
जिसमें केवल एक मुसलमानको स्वामी गुरु दत्तात्रेयको फूल चढाने, पाद पूजा और नंदा दीप प्रज्जवलित करनेके लिए नियुक्त किया था ।
      न्यायालयने तत्कालीन कांग्रेस शासनके आदेशको समाप्त करते हुए अपने आदेशमें कहा, “संविधानका अनुच्छेद २५ अन्तरात्माकी स्वतन्त्रता और धर्मके स्वतन्त्र अभ्यास और प्रचारका अधिकार देता है; परन्तु शासकीय आक्षेपित आदेशद्वारा (२०१८ के), सबसे प्रथम राज्यने हिन्दू समुदायके उनके धर्मके अनुसार पूजा और अर्चना करनेके अधिकारका उल्लङ्घन किया है । दूसरे राज्यने मुसलमानपर पादुका पूजा करने और उसकी आस्थाके विपरीत नंदा दीप जलानेके लिए नियुक्त किया है । ये दोनों अधिनियम भारतके संविधानके अनुच्छेद २५ द्वारा अधिकृत दोनों समुदायके अधिकारोंका घोर उल्लङ्घन है ।”
              भारतीय जनता दलने नेता सी टी रविने अपने ‘ट्वीट’ में लिखा, “हिन्दुओंके लिए बहुत बडी जीत । कर्नाटक उच्च न्यायालयने शासनको दत्तपीठमें हिन्दू पुजारियोंको नियुक्त करनेका आदेश दिया । न्यायमूर्ति नागमोहन दास समितिकी पक्षपातपूर्ण सूचनाको परिवर्तित करनेके उच्च न्यायालयके निर्णयका मैं स्वागत करता हूं ।”
      जिस पन्थमें पूजा अमान्य (हराम) है, उस पन्थके व्यक्तिको पूजाकी अनुमति देनेवाले बुद्धिभ्रष्ट न्यायाधीश (जनपद न्यायालय), इस कथित न्यायव्यवस्थाके अंग हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है । इस व्यवस्थाको परिवर्तित करने हेतु हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना अनिवार्य है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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