‘इमामबाडे’में लघु वस्त्र धारणकर प्रवेश वर्जित, माथा भी ढंकना पडेगा, नृत्यका श्रव्यदृश्य प्रचलित
२ अक्टूबर, २०२१
उत्तर प्रदेशकी राजधानी लखनऊके बडा ‘इमामबाडे’से बहुत बडा ‘फरमान’ प्रस्तुत हुआ है । एक युवतीका नृत्य श्रव्यदृश्य प्रचलित होनेके उपरान्त लगे नूतन प्रतिबन्धके पश्चात प्रशासन सक्रिय हो गया है । इस श्रव्यदृश्यके प्रचलित होनेके पश्चात लखनऊमें तनावपूर्ण वातावरण है । नूतन प्रतिबन्धके अन्तर्गत महिलाओं और युवतियोंको लघुवस्त्र धारण करनेपर प्रवेश नहीं दिया जाएगा । बडे ‘इमामबाडे’में प्रवेश करनेवाली युवतियों और महिलाओंको न्यासकी ओरसे माथा ढकनेके लिए दुपट्टा भी दिया गया है ।
धर्मान्धोंके लिए महिलाएं वस्तु तुल्य होती है, उन्हें मिठाईकी भांति इसलिए ढंका जाता है, जिससे मखियां उनपर भ्रमण न करे, ऐसा हीन दृष्टिकोण ‘मौलानाओं’द्वारा मुसलमानोंको महिलाओंके ‘हिजाब’ धारण करनेके सन्दर्भमें बाल्यकालसे ही सिखाया जाता रहा है । वस्तुतः ऐसे हीन दृष्टिकोण इनके चित्तमें (जहन) सनी अनियन्त्रित कामवासनाकी ही उपज है; अतः जो धर्मान्ध अपने समाजकी महिलाओंपर इतना अत्याचार कर सकते हैं,वे अन्य धर्म या पन्थकी नारियोंको किस दृष्टिसे देखते होंगे, यह विचारणीय है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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