मन्दिरोंमें रहेंगे मात्र हिन्दू कर्मचारी, अहिन्दुओंपर व्यय नहीं होगा चढावेका धन अथवा सोना-चांदी, हिमाचल शासनका धार्मिक आदेश


३ अक्टूबर, २०२१
    अमर उजालाके समाचार अनुसार, हिमाचलके मुख्यमन्त्री जयराम ठाकुरने निर्णय लिया है कि वहांके मन्दिरोंमें मात्र हिन्दू कर्मचारियोंकी नियुक्ति की जाएगी । राज्यके शक्तिपीठों तथा हिन्दू संस्थानोंपर किए जानेवाले दानका व्यय अहिन्दुओंपर नहीं किया जाएगा । चढावेपर प्राप्त धनराशि तथा सोना-चांदी मात्र हिन्दुओंपर व्यय की जाएगी । मन्दिर सुरक्षासे लेकर, मन्दिरसे सम्बन्धित सभी पदोंपर केवल हिन्दू कर्मचारी नियुक्त किए जाएंगे । वहांके भाषा कला एवं सांस्कृतिक विभागने हिमाचल प्रदेश हिन्दू सार्वजनिक धार्मिक संस्था व पूर्त विन्यास अधिनियम-१९८४ की धारा-२७ के अन्तर्गत यह आदेश प्रकाशित किया है । मुख्य सचिव आर डी धीमानने यह अधिसूचना प्रकाशित की । हिमाचलप्रदेशके मन्दिरोंमें आए चढावेकी धनराशि अधिकोषोंमें (बैंकोंमें) ‘फिक्स डिपाजिट’ बनाकर रखी जाती है । चढावेमें वर्षोंसे सोना-चांदी भी रखी हुई है । चढावेसे ही पुजारियों तथा अन्य कर्मचारियोंके ‘वेतन-भत्ते’ आदि दिए जाते हैं । यहां प्राप्त धनको प्रतिमाओं, मन्दिरोंकी सजावट, संस्कृत शालाएं, महाविद्यालय आदिपर व्यय किया जाता है । धातुओंको पिघलाकर श्रद्धालुओंको ‘सिक्के’ देनेकी भी योजना थी, जो सफल नहीं हो सकी ।
      हिमाचलप्रदेश शासनका निर्णय स्वागत योग्य है । अभीतक संविधान अनुसार सभी राज्योंके मन्दिरोंमें प्राप्त चढावेकी राशिपर राज्यशासनका अधिकार होता है । इस धनका उपयोग ‘गिरिजाघरों’ एवं ‘मस्जिदों’के अनुरक्षण (रखरखाव) तथा निर्माणमें होता है । कुछ वर्ष पूर्वतक दी जानेवाली ‘हज सब्सिडी’ भी इसीसे जाती थी । अचरज यह कि संविधान अनुसार ‘मस्जिद’ व ‘गिरिजाघरों’के धनका लेखा-जोखा नहीं पूछा जाता । उसपर राज्य या केन्द्रका अधिकार नहीं होता । हिमाचल शासनने इस विषमताको दूर कर एक उदाहरण प्रस्तुत किया है, इस हेतु वह अभिनन्दनका पात्र है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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