करीमने करण बनकर दलित युवतीको फांसा, ११ दिनतक किया दुष्कर्म, घुमानेके ‘बहाने’ ले गया था, अब बनाया गया बन्दी


२ अक्टूबर, २०२१
       मध्य प्रदेशके बडवानी जनपदमें ‘लव-जिहाद’का प्रकरण उजागर हुआ है । वहां करीमने करण बनकर, द्वितीय वर्षमें पढनेवाली दलित छात्राको अपना नाम परिवर्तनकर, अपने जालमें फंसाया तथा उसे घुमानेके बहाने इंदौर ले गया एवं ११ दिनोंतक पीडिताके साथ दुष्कर्म करता रहा । उस मध्य भी उसने अपना अभिज्ञान (पहचान) प्रकट नहीं होने दिया ।
      प्रतिवेदनके (रिपोर्टके) अनुसार, ये घटना बडवानी जनपदके पानसेमल ‘थाना’ क्षेत्रके अन्तर्गत आनेवाले एक गांवकी है । जहां, २२ वर्षीय युवती पानसेमलके ही शासकीय महाविद्यालयमें ‘बीए’ द्वितीय वर्षकी छात्रा है । दोनोंकी मित्रता लगभग डेढ माह पूर्व ही हुई थी । उस मध्य उसने स्वयंको आदिवासी बताते हुए, अपना नाम करण जाधव बताया था । अभिज्ञान होनेके पश्चात दोनों निकट आते चले गए, वे ‘व्हाट्सऐप्प’के माध्यमसे ‘वीडियो कॉल’पर भी बातें करने लगे थे ।
      इस मध्य, गत २० सितम्बर २०२१ को करण (वास्तविक नाम करीम) पीडिताको ‘बहला-फुसुलाकर’ इंदौर ले गया । वहां ११ दिनतक पीडिताको झांसेमें रखकर दुष्कर्म किया ।
    ‘पुलिस’को किए परिवादमें (शिकायतमें) पीडिताने बताया है कि वह करण नहीं करीम है और उसके पिताका नाम रहीम है और वह भी पानसेमलमें ही रहता है । पीडिताके परिवादके आधारपर ‘पुलिस’ने ‘आईपीसी’की धारा-३७६ (दुष्कर्म), ‘एससी/एसटी’ अधिनियम और ‘लव-जिहाद’ विधानके अन्तर्गत आरोपितके विरुद्ध अभियोग प्रविष्ट किया है । इस घटनामें ‘एसडीओपी’ पीएस बघेलके अनुसार, आरोपितको अभिरक्षामें (हिरासतमें) ले लिया गया है ।
     उपरोक्त प्रकरणसे स्पष्ट है कि किस प्रकार नाम परिवर्तित करके ये जिहादी दुष्कृत्य कर रहे है । समाजमें इतने ‘लव-जिहाद’के प्रकरण सामने आनेके पश्चात भी, यह रुकनेका नाम नहीं ले रहा है । कारण ? हिन्दू सीख नहीं ले रहे है और सोचते है कि यह उनके साथ नहीं होगा; कदाचित यह वृत्ति ही हिन्दुओंके विनाशका कारण बन रही है । हम यह कब समझेंगे कि जो कलको पडोसीके साथ घटित हुआ है, वह एक दिन हमारे साथ भी होगा; अतः वर्तमानमें हों रहे घटनाक्रमोंसे सीख ले और सतर्क रहें ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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