४ वर्षकी बालिकाका यौन शोषण करनेवाले ‘सेंट जोसेफ प्ले स्कूल’के अध्यापककी प्रतिभूति आदेशको मद्रास उच्च न्यायालयने किया निरस्त


२२ अक्टूबर, २०२१
           मद्रास उच्च न्यायालयने पुडचेरीके ‘सेंट जोसेफ प्ले स्कूल’के अंग्रेजी विषयके अध्यापकको यौन शोषणके प्रकरणमें प्रतिभूति प्रदान करनेवाले निचले न्यायालयके आदेशको परिवर्तित कर दिया है । आरोपी अलर्म पेरीरापर ४ वर्षकी बालिकाको गोदमें बैठाकर यौन शोषण करनेका आरोप है ।  यह प्रकरण अप्रैल २०१८ में सामने आया था, जब बच्चेकी मांको उसकी जानकारी मिली । इससे पूर्व २७ अप्रैल २०१८ को आरोपीने बच्चीको कथित रूपसे धमकी दी थी कि यदि उसने किसीको इस विषयमें बताया तो ‌वह उसे मार डालेगा । इसके पश्चात बालिका अत्याधिक भयभीत हो गई थी; परन्तु उसने साहसकर अपनी मांको उक्त विषयमें अवगत कराया । इसके पश्चात ही आरोपीके विरुद्ध ‘पोक्सो’ अधिनियमकी धाराके अन्तर्गत, प्रकरण प्रविष्ट हुआ । समाचारके अनुसार, आरोपीको मुक्त करते हुए निचले न्यायालयने कहा था कि पीडित बच्चीके माता-पिताके वक्तव्य सुसंगत नहीं है । पुडुचेरीके लोक अभियोजक डी. भरत चक्रवर्तीने कहा था कि पीडित बच्ची हैं और वह मार्च,२०१८ में मात्र ४ वर्षकी थी; परन्तु न्यायालयने इस विषयपर ध्यान नहीं दिया । अब इस निर्णयको मद्रास उच्च न्यायालयमें चुनौती दी गई । न्यायालयनें कहा कि दोषी तकनीकी कारणोंके चलते मुक्त हो रहे हैं और दुर्भाग्यसे जांच इकाई मानकके अनुरूप नहीं हैं । जांचमें त्रुटिके कारण अधिकांश प्रकरणोंमें अपराधी बच कर भाग रहे हैं;  इसलिए तकनीकको न्यायिक प्रक्रियाके मध्य आनेकी अनुमति नहीं देनी चाहिए ।
वहीं एक अन्य प्रकरणमें ‘सेंट जोसफ’ पाठशालाके प्रधानाध्यापकने, चोटी कटवानेसे मना करनेपर छात्रको  प्रताडित किया और पाठशालासे बाहर निकाल दिया ।
      घटना छत्तीसगढके जनपद कांकेरके ‘सेंट जोसफ हायर सेकेंड्री स्कूल’की है ।  गुरुवार, २१ अक्टूबर २०२१ को वहीं पढनेवाले एक छात्रको शिखा (चोटी) काटनेका आदेश दिया । दसवीं कक्षामें पढनेवाले छात्र अंश तिवारीके अनुसार, प्रधानाध्यापकने उसे शिखा न कटवानेपर पाठशालामें नहीं आने दिया । अंश तिवारीके परिजनने भी आरोप लगाया है कि दो दिवससे प्रधानाध्यापक (प्रिंसिपल) जोमोन पीटीने अभिभावकोंसे छात्रकी शिखा कटवाकर भेजनेके लिए कहा । परिजनके अनुसार, उनके बेटे अंश तिवारीको पाठशालामें कई बार प्रताडित किया जा चुका है; किन्तु छात्रने इसे अपने धर्मका प्रतीक बताकर कटवानेसे मना कर दिया । इससे रुष्ट होकर ‘प्रिंसिपल’ने उसे  पाठशालासे बाहर निकाल दिया था ।
      जो हिन्दू, अपनी सन्तानोंको, कथित स्तरीय शिक्षाके लिए ईसाई विद्यालयोंमें प्रविष्ट कराते हैं, वे उक्त प्रकरणसे बोध लें ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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