ईसाई बन, प्रत्येक माह २० सहस्र मिलेंगे, पत्नीको भी घर भेज दूंगा, अभिषेकपर ऐसे डाला जा रहा धर्मान्तरणका दबाव


२२ अक्टूबर, २०२१
      मध्य प्रदेशके जनपद सागरमें धर्मान्तरणके लिए दबाव बनानेका प्रकरण चर्चामें आया है । यह दबाव कैंट ‘थाना’ क्षेत्रके भैंसा गांव निवासी अभिषेक अहिरवारपर बनाया जा रहा है । अभिषेकका आरोप है कि ईसाई बन चुके उसके फूफा ससुर, इस प्रकरणके सूत्रधार हैं । अभिषेकने अपनी पत्नीको  बहला-फुसलाकर मायकेमें ही रोक लेनेका परिवाद ‘पुलिस’से किया है ।
      समाचार माध्यमोंके अनुसार, अभिषेकके परिवादपर ‘पुलिस’ने आरोपित फूफा ससुर रमेश मसीहपर अभियोग प्रविष्ट कर लिया है । यह परिवाद मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतन्त्रता अधिनियम २०२१, ५०६ व धारा-३४ में प्रविष्ट किया गया है । ‘पुलिस’ने इस प्रकरणमें २ अन्य लोगोंको भी आरोपित किया है । ये दोनों मुख्य आरोपित रमेश मसीहके सहयोगी बताए जा रहे हैं ।
      अभिषेकके अनुसार, ८ दिसम्बर २०२० को उसका विवाह सागर जनपदके खुरईकी रहनेवाली सपनाके साथ हुआ है । विवाह हिन्दू विधि-विधानके साथ सम्पन्न हुआ था । कुछ दिन सब ठीक चला; किन्तु अचानक ४ माह पश्चात, अभिषेककी पत्नीका फूफा धर्मान्तरणका दबाव बनाने लगा । इसके साथ ही उसने सपनाको भी अभिषेकके विरुद्ध भडकाना आरम्भ कर दिया ।
      धीरे-धीरे सपनाको उसकी ससुराल भेजनेमें भी आनाकानी की जाने लगे। अगस्त २०२१ में सपना रक्षाबन्धनके लिए अपने मायके खुरई गई थी । कुछ समय पश्चात उसके फूफा रमेश मसीहने उसको अपने घर बुला लिया; उसके पश्चात सपनाको पुनः नहीं भेजा गया है ।
      ‘पुलिस’को दिए गए प्रार्थनापत्रमें १९ वर्षीय अभिषेकने बताया है कि उसकी पत्नीको उसके फूफा ससुर रमेश मसीहने बहला-फुसलाकर अपने घरमें रख लिया है । पत्नीको विदा करनेके लिए उसपर धर्मपरिवर्तनकर ईसाई बननेका दबाव बनाया जा रहा है । धर्म-परिवर्तनके पश्चात, उसको प्रतिमाह २० सहस्र धन मिलनेका भी प्रलोभन दिया जा रहा है ।
       देशमें ईसाई धर्मान्तरण जिहादियोंसे अधिक चिन्ताका विषय है । कांग्रेसके शासनमें अपनी जडे स्थापितकर चुकी ईसाई ‘मिशनरियां’, जिस गुपचुप युक्तियोंसे दूरस्थ क्षेत्रके आदिवासियोंमें धर्मान्तरण कर ही रहे थे, वह अब नगरीय क्षेत्रोंमें भी धर्मान्तरणके प्रयास कर रहे हैं । यह केन्द्रमें मोदी शासन और राज्य शासन एवं स्थानीय प्रशासनकी विफलता ही है कि अधिकतर राज्योंमें धर्मान्तरण विरोधी विधान है; उसके पश्चात भी यह रुकनेका नाम नहीं ले रहा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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