वाराणसीमें नट समुदायके लोगोंपर बलपूर्वक ‘मुसलमानी मजहब’ स्वीकार करनेका दबाव 


७ नवम्बर, २०२१
       उत्तर प्रदेशकी धर्मनगरी वाराणसीमें नट समाजके कई लोगोंने मुसलमान ‘मजहब’में सम्मिलित होनेके लिए, उनपर दबाव बनाए जानेका आरोप लगाया है । उनके नट-समुदायके शवोंको गाडनेसे रोका जा रहा है और ‘इस्लाम’ अपनानेके पश्चात ही इसकी अनुमति देनेकी बात कही जा रही है ।  ३० अक्टूबर २०२१ को इस घटनाका परिवाद स्थानीय फूलपुर ‘थाने’में किया गया । हिन्दू जागरण मंचने भी प्रशासनसे दोषियोंके विरुद्ध कठोर कार्रवाही करनेकी मांग की है । इस घटनाका चित्रपट अन्तर्जालपर प्रसारित हो गया है । २९ अक्टूबरको रामपुर गांवकी निवासी सुशीला देवीकी मृत्यु होनेपर, उनके पति सचाऊ नट परम्परागत, अपने समुदायके अन्य लोगोंके साथ मृतकाको भूमिगत करनेके लिए भरावर बस्ती पहुंचे; किन्तु उन्हें अन्तिम संस्कार करनेसे रोक दिया गया । रोकनेका कारण पूछनेपर उन्हें मुसलमान धर्म स्वीकार करनेके लिए बाध्य किया गया । घटनाकी जानकारी हिन्दू संगठनोंको होनेपर, ‘पुलिस’को सूचित किया गया । ‘पुलिस’की चेतावनीके पश्चात,  ‘पुलिस’की उपस्थितिमें मृतकाका अन्तिम संस्कार हो पाया ।  इस्लाम स्वीकार करानेवाले लोग भी पूर्वमें हिन्दुओंके नट समाजसे ही थे । धर्मान्तरणके पश्चात, उन्हींके द्वारा शेष नटोंपर भी उसीका दबाव बनाया जा रहा है । परिवादमें उन्होंने भू समाधि परम्परामें व्यवधान डाले जानेका विवरण दिया है । प्रार्थनापत्रमें यह भी बताया गया है कि भूसमाधिस्थल उनका परम्परागत स्थल  है । नटोंके अनुसार यह भूमि शासनद्वारा आवंटित है । धर्मान्तरणका दबाव बनानेवाले ये सभी लोग स्वयंके धर्मान्तरणका कोई प्रमाण भी नहीं दिखाते । प्रार्थनापत्रके अनुसार, वह भूमि हिन्दूके नामपर पंजीकृत है । ऐसेमें किसी मुसलमानद्वारा उसपर अधिकार नहीं जताया जा सकता है । इसके साथ ही धर्मान्तरण कर चुके नटोंद्वारा अपने आधार कार्ड जैसे सभी पत्रकोंमें हिन्दू नाम रखकर शासकीय सुविधाएं लेनेपर भी प्रश्न उठाए गए ।
      भू-जिहादी किसी भी प्रकार, हिन्दुओंकी भूमि हडपने अथवा उनका छल-बलसे धर्मान्तरण करनेके अवसर ढूंढते रहते हैं, जोकि दण्डके पात्र हैं । हिन्दुओंको संगठित होकर, ऐसे धर्मद्रोहियोंका प्रतिकार करना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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