केरलके हिन्दुओं-ईसाइयोंको कट्टरपन्थीकी श्रेणी, ‘थूकवाले विश्रामलयों’ या ‘इस्लामी’ रूढियोंपर प्रश्नसे कष्ट क्यों ?
२३ नवम्बर, २०२१
देहली, गुरुग्राम, गाजियाबाद, मेरठके थूकवाले सार्वजनिक दृष्यश्रव्यके पश्चात अब केरलके लोगोंने ‘थूकवाले विश्रामालयों/भोजनालय’ आदिसे दूरी बनानी आरम्भ कर दी है । यह ‘ट्रेंड’ तब पता चला जब केरलके लोग ‘Thuppal Shawarma’ से लेकर ‘Thuppal Biriyani’ जैसे ‘कॉमेंट्स’ करके ऐसे विश्रामालयों/भोजनालयको प्रतिबन्धितकी (बायकॉटकी) बात कर रहे हैं । केरलके लोग एक पग आगे बढ कर स्वयंको सुरक्षित कर रहे हैं तो अतिशयोक्ति नहीं ।
‘The News Minute’ के एक प्रतिवेदनके अनुसार, केरलके कट्टरपन्थी ईसाई और हिन्दू समूहोंने ‘खानेमें थूक’के विरुद्ध अभियान छेड दिया है । इन समूहोंने ‘वॉट्सऐप्प’पर किस जनपदमें, यहांंतक कि किस क्षेत्रमें कौन-कौनसे ‘थूक मुक्त विश्रामालय (spit-free hotels)’ हैं, उसकी सूची भी साझा कर रहे हैं । यह सूची विश्रामालयके स्वामीसे उनके यहांं कार्य करनेवाले लोगों और उनके धर्मके विषयमें पूछकर सिद्ध की (तैयार की) जा रही है । इस प्रतिवेदनमें २ समस्याएं हैं, प्रथम खानेमें थूकनेवाले (या थूकते दिखनेवाले) दृश्यश्रव्यका बचाव किया गया है । बताया गया है कि कुछ ‘मौलवी-मौलाना’ खानेमें नहीं थूकते हैं, वे मुंंहसे ‘हवा’ फूंंकते हैं । ‘फर्जीवाडा’ फैलानेवाले ‘AltNews’का सहारा भी इसके लिए लिया गया है । प्रतिवेदन यह बतानेमें चूक जाता है कि यदि ऐसा है तो सडक किनारे किसी ढाबेमें रोटी सेंकता एक व्यक्ति उसे भट्ठीमें डालनेसे पूर्व उसपर थूकता या मुंंहसे ‘हवा’ क्यों फेंकता है ? क्या ‘मौलवी-मौलाना’ ही ढाबेमें चाकरी करते हैं ? इस प्रतिवेतनमें द्वितीय समस्या है भाषा । “रुचिकर बात यह है कि इस अभियानको किसी हिन्दू संगठनने नहीं, वरन कट्टरपन्थी ईसाई समूहोंने आरम्भ किया था । ‘सोल्जर्स ऑफ क्रॉस (Soldiers of Cross)’ जैसे ‘फेसबुक पेज’ केरलके ऐसे विश्रामालयोंकी सूची साझा कर रहे हैं, जो ‘थूक मुक्त भोजन (spit-free food)’ परोसते हैं । इन सूचियोंमें हिन्दुओं या ईसाइयोंके स्वामित्ववाले विश्रामालय सम्मिलित हैं ।”
खानेमें थूकना (या इनके अनुसार मुंंहसे ‘हवा’ फूंंकना) कट्टरपन्थ नहीं है, वरन स्वयंको स्वस्थ रखनेके लिए अपने आस-पासकी वस्तुओंपर दृष्टि रखना कट्टरपन्थ है । वामपन्थी ‘मीडिया’ जो पहले हिन्दुओंपर आक्रमण करती थी, अब ईसाइयोंपर आक्रमण कर रही है; इसलिए क्योंकि इन ईसाइयोंको भी अपनेको स्वस्थ रखनेकी चिन्ता है । इसलिए भी क्योंकि अब जो ईसाई ‘थूक मुक्त भोजन (spit-free food)’की अभियान चला रहे हैं, वे ‘लव-जिहाद’के विरुद्ध भी स्वर उठा चुके हैं । आश्चर्य यह कि खानेवाले इस प्रतिवेदनमें भी ‘लव-जिहाद’का उल्लेख है । प्रतिवेदनमें ‘लव-जिहाद’को एक ‘बदनाम कैंपेन’ घोषित करते हुए इसे ‘भाजपा’ और कट्टरपन्थी ईसाई समूहोंसे जोडा गया है ।
जिहादियोंके भोजन सम्बन्धी विकृत कृत्योंका समर्थन करना वामपन्थी पत्रकारितापर भय व मनोविक्षिप्तताकी छाप परिलक्षित करती है । भोजन सम्बन्धी दिव्य आचार धर्म व साधना एवं पत्रकारिता क्षेत्रकी शुद्धिके लिए हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनार्थ सभीको कृतिशील होना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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