नैनीताल ‘भूमि-जिहाद’, सरनामें मुसलमानोंद्वारा अनुसूचित जाति लोगोंको प्रलोभन देकर और दबाव बनाकर भूमि क्रय प्रकरणमें जांचका आदेश
२९ नवम्बर, २०२१
उत्तराखंडके नैनीताल जनपदमें धारी ‘तहसील’ क्षेत्रके सरना गांवमें अनुसूचित जातिके लोगोंको प्रलोभन देकर और दबाव बनाकर समुदाय विशेषके भूमि क्रयके प्रकरणकी प्रदेश शासनने जांच करनेके आदेश दिए हैं । शासनने नैनीतालके जिलाधिकारीको प्रकरणका परीक्षणकर जानकारी उपलब्ध करानेके निर्देश दिए हैं । प्रदेशके अपर सचिव राजस्व डॉ. आनंद श्रीवास्तवने इस सम्बन्धमें नैनीतालके जिलाधिकारीको पत्र लिखा था ।
पत्रमें उन्होंने अवगत कराया था कि सितम्बर माहमें २१ व २२ दिनांकको सरना गांवमें एक साथ १३ व्यक्तियोंद्वारा भूमिका पंजीकरण कराया गया । यह भूमि अलीगढ, सम्भल आदि स्थानोंके एक समुदाय विशेषके लोग हैं । उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि इसे विपणी भावसे अत्यन्त न्यून मूल्यमें क्रय किया गया है । ‘खरीददारों’ने क्रय-विक्रय ‘नकद’ किया है ।
विचारणीय है कि नैनीतालके विभिन्न क्षेत्रोंमें मुसलमानोंका हस्तक्षेप बढता ही जा रहा है । उच्च न्यायालयके अधिवक्ता नितिन कार्कीने इस ‘डेमोग्राफिक’ परिवर्तनके सम्बन्धमें सतर्क करते हुए कुछ दिनों पूर्व ही जनपद प्रशासनके माध्यमसे मुख्यमन्त्रीको ज्ञापन सौंपा था ।
जिहादी अनेक माध्यमोंसे हिन्दुओंको उनके मूल स्थानसे विस्थापित करनेके प्रयास करते रहते है । नैनीतालमें भी भूमि जिहादके अन्तर्गत, छलकर भूमि क्रय करनेका प्रयास किया गया है । ऐसे प्रकरणोंपर प्रशासनके साथ ही हिन्दुओंको भी सतर्क रहनेकी आवश्यकता है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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