‘सुपरमार्केट’में हिन्दू प्रतिमाएं देखकर ‘भडका’ ‘इस्लामी’ समूह, पत्र लिखकर रखी प्रतिमा हटानेकी मांग
०७ दिसम्बर, २०२१
त्रिनिदाद और टोबैगो नामक कैरिबियाई देशमें ‘अंजुमन सुन्नतुल जमात एसोसिएशन’के एक विभाग ‘रियल स्ट्रीट जमात’ने ‘सुपरमार्केट’में हिन्दू प्रतिमाएं दिखनेपर ‘इस्लामी’ समूहने ‘प्राइस क्लब सुपरमार्केट’को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति जताई कि वे लोग हिन्दुओंसे सम्बम्धी वस्तुओंको क्यों विक्रय रहे हैं । अन्तर्जालपर ‘हाजी रुकनुद्दीन इंस्टिट्यूट ऑफ इस्लामिक स्टडीज’की एक छात्राने वहां हिन्दू प्रतिमाएं और हिन्दुओंसे जुडी सामग्री विक्रयपर लगी देखी । हाजीने इन प्रतिमाओंको वहांसे हटानेकी बात अपने पत्रमें कही और ये भी लिखा कि ‘अल्लाह’ हमें इस प्रकोपसे बचाए । ‘सुपरमार्केट’ प्रशासनकी ओरसे हिन्दू प्रतिमाएं और सामग्री हटानेसे मना कर दिया गया है । ‘सुपरमार्केट’ने अपने ‘फेसबुक पोस्ट’में लिखा कि पिछले २७ वर्षोंसे उन्होंने सभी पन्थों और जातियोंके लोगोंके लिए एक परिवार उन्मुख वातावरण प्रदान किया है । ‘पोस्ट’में हाजीपर आरोप लगाया गया कि उनकी ‘सुपरमार्केट’के एक निदेशकके साथ शत्रुता है; इसलिए ‘प्राइस क्लब ‘किसी भी ऐसे व्यक्तिके वक्तव्योंपर संज्ञान नहीं लेगा, जो इन्द्रधनुष जैसे राष्ट्रमें असमानता और अशान्ति उत्पन्न करे । ‘सुपरमार्केट’ प्रशासनने हाजीको फटकार लगाते हुए बताया कि वे उपभोक्ताकी आवश्यकता और मांग देखकर सामग्री रखते हैं और वे किसी एक धर्मसे नहीं जुडे हुए ।
‘सुपरमार्केट’ने पाया है कि पत्र लिखनेवाला अन्तर धार्मिक संगठनकी समितिमें कार्यरत है और ऐसा विभाजनकारी व्यक्ति उस पदपर कार्य करता है, जिसपर सौहार्द, सहिष्णुता बनाए रखनेका उत्तरदायित्व होता है । ‘मार्केट’ प्रशासनने हाजी इम्तियाज अलीसे क्षमा मांगनेकी मांग की है ।
जिस म्लेच्छ प्रजातिको हिन्दू प्रतीकोंसे इतनी घृणा है, उन्हें हिन्दुओंसे कितनी घृणा होगी ? इसका विचार हिन्दुओंको करना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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