जामिया हिंसा प्रकरणमें प्रतिभूतिके पश्चात भी बन्दीगृहमें ही रहेगा शरजील इमाम, देहली उपद्रवसे जुडे ३ अन्य प्रकरणोंमें है आरोपित
०९ दिसम्बर, २०२१
देहली न्यायलयने गुरुवार, ०९ दिसम्बरको राजधानी स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालयमें भडकाऊ भाषण देने और उपद्रव भडकानेके प्रकरणमें आरोपी शरजील इमामको प्रतिभूति (जमानत) प्रदान की है; किन्तु प्रतिभूति मिलनेपर भी वह बाहर नहीं आ सकेगा और वह कारागृहमें ही रहेगा; क्योंकि फरवरी २०१९ में देहलीमें हुई हिंसासे सम्बन्धित तीन अन्य प्रकरणोंमें भी उसे आरोपित बनाया गया है । शरजील इमामके भडकाऊ भाषणके कारण दिसम्बर २०१९ में विश्वविद्यालयके बाहर हिंसा हुई थी ।
गत वर्ष २३ से २६ फरवरीके मध्य उत्तर-पूर्वी देहलीमें नागरिकता संशोधन कानूनके विरोधके नामपर हिन्दू विरोधी हिंसा हुई थी । इस मध्य सतत भडकाऊ भाषण दिए जाते रहे थे । देहली ‘पुलिस’का प्रतिवाद है कि इस हिंसाके पीछे एक बहुत बडा षड्यन्त्र है, जिसके कारण ५३ लोग मारे गए थे । अप्रैल २०२० में देहली ‘पुलिस’ने शरजील इमामपर देशद्रोहका आरोप लगाते हुए कहा था कि उसके भाषणने लोगोंके मध्य वैमनस्यता बढाई, जिसके कारण जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय क्षेत्रमें उपद्रव हुए । देहली ‘पुलिस’की ‘क्राइम ब्रांच’ने अपनी जांंचमें पाया कि शरजील इमामने जामिया विश्वविद्यालयके साथ-साथ अलीगढ विश्वविद्यालयमें भी भडकाऊ भाषण दिया था ।
राष्ट्र विरोधी रूपी जघन्य अपराधमें आरोपित दल किसी भी प्रकारकी ‘कानूनी’ विसंगतियां निकालनेमें विफल रहे, यह न्यायालय और भारत शासन सुनिश्चित करे और आरोपितको यथोचित दण्ड दिया जाए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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