काशी ‘कॉरिडोर’के उद्घाटनपर फारूक अब्दुल्लाने व्यक्तकी अपने मनकी वेदना


१३ दिसम्बर, २०२१
             वाराणसीमें प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदीने सोमवार, १३ दिसम्बर २०२१ को काशी विश्वनाथ ‘कॉरिडोर’का उद्घाटन किया । इसपर ‘नेशनल कॉन्फ्रेंस’के प्रमुख फारूक अब्दुल्लाने अपने मनकी वेदना लोगोंसे साझा की । अब्दुल्लाने वाराणसीमें आयोजित भव्य कार्यक्रमपर प्रधानमन्त्रीको बधाई दी तथा कहा कि प्रधानमन्त्रीको दूसरे धर्मको भी महत्त्व देना चाहिए; क्योंकि वह मात्र एक धर्मके नहीं सम्पूर्ण भारतके प्रधानमन्त्री हैं और भारतमें बहुत सारे धर्म है । उन्होंने रक्षामन्त्री राजनाथ सिंहके वक्तव्यका भी समर्थन किया और भारतके विभाजनको ऐतिहासिक भूल बताया । उन्होंने कहा कि इस विभाजनसे क्षति कश्मीरियोंको ही नहीं; अपितु पूरे भारतके मुसलमानोंको भुगतनी पड रही है । उनके अनुसार, यदि दोनों राष्ट्र एक होते तो ‌शक्ति भी अधिक होती, समस्याएं भी उत्पन्न न होती और देशमें ‘भाईचारा’ भी रहता । फारुखके अनुसार, भारत पाकिस्तानके मतभेदके कारण देशमें तनावमें वृद्धि होती है । वहीं हिन्दू तथा हिन्दुत्वको लेकर राहुल गांधीद्वारा दिए गए वक्तव्यपर प्रतिक्रिया देते हुए फारूकने कहा कि “कोई धर्म निकृष्ट (बुरा) नहीं होता है, मानव निकृष्ट होते हैं ।” उन्होंने कहा कि वह आशा करते हैं कि हिन्दू शुद्ध हिन्दू बने और अपने धर्मका पालन करें !
       प्रत्येक धर्मको (वस्तुतः पन्थको) महत्त्व देनेके विषयपर भाषण देनेवाले फारूक अब्दुल्ला, कश्मीरमें हिन्दुओंपर हुए नरसंहारके समय चिरनिद्रामें लीन थे । तब उन्होंने क्यों नहीं कहा कि कश्मीर प्रत्येक धर्मके मूल निवासीका है ? ऐसे राजनेता प्रत्येक प्रकरणमें अपना स्वार्थ सिद्ध करने हेतु प्रयासरत रहते हैं । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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