‘आरजे’ सायमाने सडकपर ‘नमाज’को बता दिया संवैधानिक अधिकार, ‘डीयू’ प्राध्यापकने पूछा, “४२ मन्दिर और १८ गुरुद्वारा क्यों ?


११ दिसम्बर, २०२१
      रेडियो मिर्चीकी ‘आरजे’ सायमाने गुरुग्राममें सार्वजनिक स्थानों और सडकोंपर ‘नमाज’का पक्ष लेते हुए इसे संवैधानिक अधिकारतक बता डाला । उन्होंने संविधानके अनुच्छेद-२५ की बात करते हुए कहा कि भारतका संविधान यहांके प्रत्येक नागरिकके लिए ‘धर्मकी स्वतन्त्रता’का  आश्वासन देता है ।
      साथ ही ‘आरजे’ सायमाने ये भी प्रतिवाद (दावा) किया कि शासनको कोई ‘मस्जिद’ बनानेके लिए नहीं बोल रहा है । ये बात उन्होंने देहली विश्वविद्यालयमें हिन्दीके प्राध्यापक (प्रोफेसर) अपूर्वानंदके ‘ट्वीट’पर प्रतिक्रिया देते हुए कही, जिसमें उन्होंने हरियाणाके मुख्यमन्त्री मनोहर लाल खट्टरपर ‘गुण्डोंकी भाषा’ बोलनेका आरोप लगाते हुए प्रतिवाद किया था कि गुरुग्राममें ४२ मन्दिर और १८ गुरुद्वाराके लिए अनुमति दी गई; किन्तु ‘मस्जिद’ एक ही है ।
      इसपर राजनीतिक विश्लेषक पीएन रायने उन्हें उत्तर देते हुए लिखा, “मन्दिर और गुरुद्वारा शासकीय भूमिपर नहीं बने हैं । मुसलमान भी भूमि क्रय करें, ‘मस्जिद’ बनाएं और तुम ‘पैसे’ दो । किसने रोका है ? शासकीय भूमि और सडक ‘नमाज’के लिए नहीं है ।
      इसी ‘ट्वीट’पर प्रतिक्रिया देते हुए ‘रेडियो मिर्ची’की ‘आरजे’ सायमाने संविधानका ‘राग अलापा’ । इसपर एक ‘यूजर’ने उन्हें स्मरण करवाया कि अनुछेद-२५ भी इन सबकी अनुमति स्वास्थ्य और सार्वजनिक व्यवस्थाकी समस्याएं उत्पन्न न होनेतक ही देता है । अर्थात, आप सार्वजनिक व्यवस्था भंग नहीं कर सकते । लोगोंने कहा कि कलको ये छद्म बुद्धिजीवी आतङ्कवादको भी अपना संवैधानिक अधिकार न बताने लग जाएं ।
     ‘आरजे’ सायमा और ‘डीयू’के प्राध्यापक अपूर्वानंद जैसे लोग कदाचित यह विस्मरण कर चुके है कि वे भारतमें है, न कि पाकिस्तान में । भारतमें अतिक्रमणकी नीति और व्यवस्था नहीं चलती है । यदि उन्हें यही सब करना है तो वे प्रसन्नतापूर्वक पाकिस्तान जा सकते है; किन्तु भारतमें रहनेके लिए, उन्हें यहांके विधानोंका सम्मान और पालन करना ही होगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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