* श्वांस, कास :
अ. अपामार्गकी जडमें ‘बलगमी’ खांसी और तमक श्वासको (दमेको) नष्ट करनेका चमत्कारिक गुण है । इसके ८-१० सूखे पत्तोंका धुआं, नाक द्वारसे भीतर खींचनेसे ‘दमे’के रोगमें लाभ होता है ।
आ. अपामार्ग क्षार आधा ग्राम लगभगकी मात्रामें मधु मिलाकर प्रातः सायं चटानेसे, बच्चोंके श्वास नली तथा वक्षस्थलमें संचित कफ दूर होकर, बाल कास न्यून होता है ।
इ. खांसी बार-बार कष्ट दे रही हो, कफ निकलनेमें कष्ट हो, कफ गाढा व ‘लेसदार’ हो गया हो, इस अवस्थामें या ‘निमोनिया’की अवस्थामें आधा ग्राम अपामार्ग क्षार व आधा ग्राम शर्करा, दोनोंको ४० ग्राम उष्ण जलमें मिलाकर प्रातः एवं सायं सेवन करनेसे, ७ दिवसमें बहुत ही लाभ होता है ।
ई. श्वांस रोगकी तीव्रतामें, इसके मूलका चूर्ण ६ ग्राम तथा ६ काली मिर्चका चूर्ण, दोनोंको प्रातः एवं सायं ‘ताजे’ शीतल एवं स्वच्छ जलके साथ लेनेसे बहुत लाभ होता है ।
* विसूचिका : अपामार्गके मूलके चूर्णको ३ ग्रामतक दिनमें २-३ बार शीतल जलके साथ सेवन करनेसे तुरन्त ही विसूचिका नष्ट होती है या अपामार्गके ४-५ पत्तोंका रस निकालकर, थोडा जल व मिश्री मिलाकर देनेसे विसूचिकामें लाभ मिलता है ।
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