१९२० में न्यायालयने भी माना था श्रीकृष्ण जन्मभूमिपर स्थित ‘ईदगाह’में कदापि नहीं हुई ‘नमाज’, अब रोक लगाने हेतु याचिकाकी गई प्रविष्ट
१७ दिसम्बर, २०२१
मथुरा न्यायालयमें अब विवादित ‘ईदगाह’ ‘मस्जिद’में होनेवाली ‘नमाज’के विरोधमें याचिका प्रविष्ट करते हुए, उसपर रोक लगानेकी मांग की गई है एवं ‘मस्जिद’के समीपसे जानेवाले मार्गपर भी ‘नमाज’पर पूर्णतः प्रतिबन्धके विषयमें कहा गया है । याचिकाकर्ता एवं अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह है एवं वह ‘कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आन्दोलन समिति’के अध्यक्ष भी हैं । इस याचिकामें बताया गया है कि ‘कुरान’में भी विवादित भूमिपर ‘नमाज’ पढना निषेध है; परन्तु उसके पश्चात भी गत कुछ समयसे यहांपर ‘नमाज’ पढी जा रही है एवं विरोधी पक्ष मार्गपर भी ‘नमाज’ कर रहे हैं, जो सामाजिक सौहार्द नष्ट करनेका षड्यन्त्र है । वहीं याचिकामें वर्ष १९२० में चले एक अभियोगका भी संज्ञान दिया गया है; जिसमें न्यायालयने स्पष्ट कहा था कि यह भूमि हिन्दुओंकी है । अभी भी ‘मस्जिद’की भीतोंपर (दीवारोंपर) हिन्दुओंके धार्मिक चिह्न विद्यमान हैं । प्राप्त जानकारीके अनुसार, न्यायालयने उक्त प्रकरणपर ५ जनवरी २०२२ को सुनवाई करनेके विषयमें कहा है । उल्लेखनीय है कि प्रदेशके मुख्यमन्त्री केशव प्रसाद मौर्यने कुछ दिवस पूर्व ही अपने ‘टि्वटर’ खातेपर लिखा था, “अयोध्या और काशीमें भव्य मन्दिर निर्माण आरम्भ है और अब मथुराकी सिद्धता (तैयारी) है ।”
सम्पूर्ण भारतमें अधिकांश ‘मस्जिदों’का निर्माण हिन्दू मन्दिरोंको क्षतिग्रस्त कर ही किया गया है और इसके अनेकानेक प्रमाण भी समय-समयपर प्रस्तुत होते रहते हैं । अब सत्र न्यायालयको भी प्रकरणकी सुनवाई शीघ्र अति शीघ्र करते हुए उपेक्षित वर्गको न्याय प्रदान करना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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