आरक्षणका लाभ नहीं ले पाएंगे धर्मान्तरण करनेवाले, कर्नाटक ‘एंटी-कन्वर्जन बिल’पर बोले मुख्यमन्त्री बोम्मई, “धर्म-परिवर्तनके आगे न झुकें दलित”


१४ दिसम्बर, २०२१
      उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरातका अनुसरण करते हुए, अब कर्नाटक शासन भी धर्मान्तरण विरोधी विधान लानेकी सिद्धता (तैयारी) कर रहा है । इस विधानके क्रियान्वित होते ही, धर्मान्तरण करनेवाले ‘पिछडे’ समुदाय और अनुसूचित जातिके लोगोंको शासनकी सभी कल्याणकारी योजनाओं, शिक्षा और चाकरियोंमें आरक्षणका लाभ नहीं मिल सकेगा ।
      मुख्यमन्त्री बसवराज बोम्मईने रविवारको (१२ दिसम्बर २०२१ को) सङ्केत दिया कि शीघ्र ही धर्मान्तरण रोधी विधेयकके (Anti Conversion Bill के) प्रारूपको (मसौदेको) राज्य मन्त्रिमण्डलद्वारा स्वीकृति दी जाएगी और इसे बेलगावीमें विधानसभाके शीतकालीन सत्रमें प्रस्तुत किया जा सकता है ।
      मुख्यमन्त्रीने कहा, “धर्म परिवर्तन समाजके लिए उचित नहीं है, ‘दलितों’को इसके आगे नहीं झुकना चाहिए । कर्नाटक शासन धर्म परिवर्तनको रोकनेके लिए एक विधान लानेका प्रयास कर रहा है ।” इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी धार्मिक समुदायोंके लोगोंको धर्मान्तरण विरोधी विधानसे भयभीत होनेकी आवश्यकता नहीं है ।
            ज्ञातव्य हो कि इस वर्ष फरवरीमें पूर्व ‘कानून’ मन्त्री रविशंकर प्रसादने भी राज्य सभामें आरक्षणको लेकर बडा वक्तव्य दिया था । उन्होंने कहा था कि ईसाई और मुस्लिम पन्थ अपनानेवाले आरक्षणका लाभ नहीं ले पाएंगे । इसके साथ ही ऐसे लोग, लोकसभा और विधानसभा सभा चुनावमें अनुसूचित जातिके लिए, आरक्षित पदोंपर (सीटोंपर) लडनेका अधिकार भी खो देंगे ।
      कर्नाटकके मुख्यमन्त्रीद्वारा लिए गए निर्णयका स्वागत होना चाहिए । इसी प्रकारके निर्णय अब केन्द्र शासनसे अपेक्षित है । जिससे इस धर्मान्तरणके खेलको समाप्त किया जा सके । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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