‘पीएफआई’के नेताओंके विदेशोंमें मदिरालय और भोजनालय, ‘ईडी’की ‘छापेमारी’में कई सम्पत्तियोंके मिले साक्ष्य, संगठनपर प्रतिबन्ध लगानेकी वर्षोंसे हो रही है मांग
१३ दिसम्बर, २०२१
देश विरोधी गतिविधियोंके लिए कुख्यात ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया’के (PFI के) विरुद्ध ‘मनी लॉंड्रिंग’ प्रकरणमें प्रवर्तन निदेशालयद्वारा (ईडीद्वारा) की गई कार्रवाईमें अचम्भित करनेवाले तथ्य उजागर हुए हैं । ‘पीएफआई’के नेताओं और पदाधिकारियोंके केरल स्थित चार ‘ठिकानों’पर बुधवारको (८ दिसम्बरको) की गई ‘छापेमारी’में उनके विदेशोंमें ‘बीयर’ मदिरालय और भोजनालय सहित कई सम्पत्तियोंके पर्याप्त प्रमाण मिले हैं । इस मध्य ‘पीएफआई’के सदस्योंने ‘छापेमारी’में बाधा डालनेका प्रयास किया; परन्तु केन्द्रीय ‘पुलिस’ बलकी (सीआरपीएफकी) उपस्थितिके कारण, वे इसमें सफल नहीं हो सके ।
‘ईडी’ने बताया कि ‘छापेमारी’में प्राप्त किए गए अभिलेखोंसे पता चलता है कि मुन्नार विला विस्टा परियोजना सहित केरलमें विभिन्न परियोजनाओंके माध्यमसे ‘पीएफआई’ ‘मनी लॉन्ड्रिंग’में लिप्त है । ‘ईडी’ने अपने वक्तव्यमें कहा, “पीएफआईके नेताओंद्वारा अबू धाबीमें मदिरालय और भोजनालय सहित विदेशमें सम्पत्तियां संग्रहित करनेके प्रकरण संज्ञानमें आए हैं । इसकी जांचकी जा रही है ।”
इसपर केरलमें हत्याएं करने, अस्त्र-शस्त्र रखने, विस्फोटक बाननेसे सम्बन्धित अभिलेख मिले थे । इसके पश्चात इसपर ‘अलकायदा’ जैसे ‘इस्लामिक’ आतङ्की संगठनोंके साथ सम्बन्ध होनेके आरोप लगे । इतना ही नहीं, केरल सहित दक्षिण भारतमें ‘लव-जिहाद’को प्रोत्साहित करनेके भी आरोप लगे हैं । कट्टरपन्थको प्रोत्साहित करने और इसकी देश विरोधी गतिविधियोंको देेखते हुए वर्ष २०१२ से ही इसपर प्रतिबन्ध लगानेकी मांग उठ रही है ।
देश विरोधी गतिविधियोंमें संलिप्त ‘पीएफआई’ समेत एवं उसके जैसे अन्य संगठनोंको भी, शीघ्र ही जांचके अन्तर्गत लाकर, पूर्णतः प्रतिबन्धित किया जाना चाहिए और इनके नेताओंको कारागृहमें भेजना चाहिए । ऐसी अपेक्षा भारतके लोगोंको केन्द्र शासनसे है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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