१९ दिसम्बर, २०२१
बिहारके पूर्व मुख्यमन्त्री जीतन राम मांझीने सत्यनारायण कथाको ‘भला-बुरा’ कहते हुए ब्राह्मणोंके लिए अपशब्दोंका प्रयोग किया है । बता दें कि ‘हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चाके (HAM के)’ संस्थापक जीतन राम मांझीका दल, बिहारमें मुख्यमन्त्री नीतीश कुमारके राज्य शासनमें सहयोगी है ।
अब उनका दृश्यपट ‘सोशल मीडिया’पर भी सार्वजनिक हो रहा है, जिसपर लोग कठोर प्रतिक्रिया दे रहे हैं । इसमें वे कहते हैं, “१९५६ में मृत्युसे पूर्व बाबा आंबेडकर हिन्दू धर्ममें नहीं थे । वे बौद्ध पन्थमें गए, तत्पश्चात उनकी मृत्यु हुई । उन्होंने कहा था कि हिन्दू धर्म निकृष्ट धर्म है । क्षमा कीजिएगा ! आजकल हमारे निर्धन वर्गमें भी धर्मकी परायणता अधिक आ रही है । सत्यनारायण पूजाका नाम हमलोग नहीं जानते थे; परन्तु आजकल हमारे ‘टोले’में (अपशब्द करते हुए) प्रत्येक स्थानपर सत्यनारायण भगवानकी पूजा होती है ।”
मांझीने आगे कहा, “इन पण्डितोंको हमलोगोंसे किंचित भी लज्जा नहीं (अपशब्द कहते हुए), आते हैं और कहते हैं कि हम भोजन नहीं ग्रहण करेंगे, हमें ‘नकद’ दक्षिणा ही दे दीजिए ।” उन्होंने एक कार्यक्रममें सार्वजनिक मंचसे इस प्रकारकी भाषाका प्रयोग किया; यद्यपि वहां उपस्थित लोग उनके इस भाषणपर आपत्ति प्रकट करनेके स्थानपर करताल (तालियां) बजा रहे थे ।
यद्यपि, वक्तव्यपर विवाद और दृश्यपट सार्वजनिक होनेके पश्चात, जीतन राम मांझीने क्षमा मांगते हुए कहा है कि उन्होंने उस शब्दका प्रयोग अपने समाजके लिए किया था, ब्राह्मणोंके लिए नहीं !
जीतन मांझी जैसे नेता, न दलित है और न ही वंचित । ये तो अवसरवादी राजनीतिके द्योतक है । ऐसे नेताओंके कारण ही दलित समाज, सदैव अपने वास्तविक अधिकारोंसे वंचित रह जाता है; अतः इन नेताओंका अभिज्ञानकर (पहचानकर), दलित समाज अपने उत्थानका मार्ग प्रशस्त करें तथा देशकी मुख्यधारा अर्थात आगमी हिन्दू राष्ट्रसे जुडे । इसमें ही सबका कल्याण निहित है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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