श्रीशैल मन्दिर परिसरमें मुसलमान भी खोल सकेंगे आपणी (दुकान), आंध्र शासनके निर्णयको सर्वोच्च न्यायालयने किया परिवर्तित, याचिकाकर्ता बाशाने बताया था जीवनका अधिकार


१८ दिसम्बर, २०२१

      सर्वोच्च न्यायालयने अपने एक निर्णयमें कहा है कि आंध्र प्रदेशके श्रीशैलम मन्दिरके पास व्यापार करनेसे अहिन्दुओंको रोका नहीं जा सकता । शुक्रवारको (१७ दिसम्बरको) न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड और न्यायाधीश एएस बोपन्नाने यह निर्णय सुनाया ।
      अपने निर्णयमें न्यायपीठने (बेंचने) आंध्र शासनसे कहा, “एक बार आप ऐसा कह सकते थे कि मन्दिर परिसरमें मद्य (शराब) या इस प्रकारकी कोई आपणी (दुकान) नहीं खोली जा सकती; परन्तु हिन्दूके अतिरिक्त कोई दूसरा आपणी न ले, ये उचित नहीं है । आप ऐसा कैसे कह सकते हैं कि वहां अहिन्दू फूल और खिलौने भी विक्रय नही कर सकता ?”
      ‘मीडिया’ प्रतिवेदनोंके (रिपोर्ट्सके) अनुसार, सितम्बर २०१९ में सैय्यद जानी बाशाने इस आदेशको आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालयमें चुनौती दी थी । याचिकाकर्ता सैय्यद जानी बाशाने इस आदेशको अपने जीवनके अधिकारमें हस्तक्षेप बताया था । तब उच्च न्यायालयने आंध्र शासनके आदेशपर प्रतिबन्ध लगानेसे मना कर दिया था ।
      विचारणीय है कि आंध्र प्रदेश शासनने वर्ष २०१५ में आदेश प्रकाशित किया था कि हिन्दुओंको छोडकर कोई अन्य धर्मका व्यक्ति श्रीशैलम मन्दिरसे जुडी आपणियोंकी ‘नीलामी’ प्रक्रियामें भाग नहीं ले सकता । यह आदेश उन धार्मिक क्षेत्रोंके लिए था, जो आंध्र प्रदेश ‘चैरिटेबल’ व हिन्दू धर्म संस्थान ‘एंडोमेंट एक्ट’ १९८७ के अन्तर्गत आते हैं ।
      सर्वोच्च न्यायालयके ऐसे ही निर्णयोंके कारण, आज अपने ही देशमें हिन्दुओंकी स्थिति दयनीय होती जा रही है । ऐसे ही, देहलीके एक प्रकरणमें रात्रि अति विलम्बसे सर्वोच्च न्यायालयने एक आतङ्कवादीके पक्षमें निर्णय सुनाया था; यद्यपि हिन्दुओंको नूतन विधान बताकर अभियोग टाल दिया जाता है; अतः अब समय आ गया है कि इस न्याय प्रणालीको परिवर्तित किया जाए और यह हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनाके पश्चात ही सम्भव हो पाएगा । अतः सभी हिन्दू हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना हेतु प्रयास करें ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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