सुखस्यानन्तरं दुःखं दुःखस्यानन्तरं सुखम् ।
न नित्यं लभते दुःखं न नित्यं लभते सुखम् ॥
अर्थ : महर्षि व्यास, युधिष्ठिरसे कहते हैं : सुखके पश्चात दुःख और दुःखके पश्चात सुख आता है । कोई भी न तो सदा दुःख पाता है और न निरन्तर सुख ही प्राप्त करता है ।
ये च मूढतमा लोके ये च बुद्धेः परं गताः ।
त एव सुखमेधन्ते मध्यमः क्लिश्यते जनः ॥
अर्थ : महर्षि व्यास, युधिष्ठिरको समझाते हैं : संसारमें जो अत्यन्त मूर्ख हैं, अथवा जो बुद्धिसे परे पहुंच गए हैं, वे ही सुखी होते हैं, मध्यवाले लोग कष्ट ही उठाते हैं ।
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