हमपर थूका, अंगुली उठाई, अवयस्कके साथ यौनाचार करनेवाले पादरी लॉरेंसको मिला आजीवन कारावासका दण्ड, मांने बताया ‘चर्च’में कैसे हुआ अपमान ?


३१ दिसम्बर, २०२१
      ‘गोवा क्रॉनिकल’की कार्यकारी सम्पादक सोनाक्षी दत्ताको साक्षात्कार देते हुए एक १८ वर्षके युवककी मांने बताया है कि कैसे उन्हें अपने बच्चेको न्याय दिलानेके लिए वर्षोंसे सङ्घर्ष करना पडा ? जिसके साथ यौनाचार एक ‘चर्च’ ‘पादरी’द्वारा किया गया था । २०१५ में पादरी लॉरेंसने १२ वर्षके अवयस्क युवकके साथ अप्राकृतिक सम्बन्ध बनाते हुए उसका यौनाचार किया था । ये पादरी मुंबईके दादरके शिवाजी नगरके ‘चर्च’में विद्यमान था, जिसे इस प्रकरणमें ‘पॉक्सो’ न्यायालयने आजीवन कारावासका दण्ड सुनाया है ।
      पीडितकी मांने कहा, पादरी लॉरेंसको अब दण्ड मिला है; किन्तु मुझे पहले ही पता चल गया था कि इसे दण्ड अवश्य मिलेगा; क्योंकि इसने मेरे बेटेके साथ ‘गलत’ किया था । लॉरेंसने मेरे और मेरे पतिके सामने स्वीकारा था कि उसने हमारे १२ वर्षके बच्चेके साथ क्या किया ? घुटनोंपर आकर उसने हमसे क्षमा मांगी थी कि वह पुनः ऐसा नहीं करेगा ।
      विदित हो कि २०१५ में १२ वर्षके पीडितने ‘पुलिस’को बताया था कि वह और उसका भाई ‘चर्च’ गए थे । प्रार्थनाके पश्चात उसे ‘फादर’ लॉरेंसने बुलाया और जब वह भीतर गया तो कक्ष बन्दकर लिया; तत्पश्चात उसका यौन शोषण किया । कुछ समय पश्चात युवकको घायल करके रक्त-रंजित करके छोड दिया । युवकका कहना था कि ऐसी ही घटना पादरीने उसके साथ कुछ माह पूर्व भी की थी । न्यायालयमें भी यही सब उसने बताया था ।
       कहा जाता है कि देरसे मिला न्याय, न मिलनेके समान होता है; किन्तु उपर्युक्त प्रकरणमें व्यभिचारी पादरीको लगभग ६ वर्ष पश्चात आजीवन कारावासका दण्ड मिला है, वह स्वागत योग्य है । देश हो या विदेश सर्वत्र व्यभिचारमें जिहादियों और ईसाई पादरियोंमें प्रतियोगिता है । यदि तथकथित धर्मोंके धर्मगुरु ही समाजमें महिलाओं और अवयस्क युवक-युवतियोंके लिए सङ्कट बन जाएं तो इन्हें धर्मगुरु या जिस धर्मका पालन करते हैं, उसको धर्म भी कैसे कहा जा सकता है ? – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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