धर्मसंसदमें गांधीके ऊपर टिप्पणी करनेपर नरसिंहानंदपर प्राथमिकी, कालीचरण महाराजके मुक्त नहीं कराए जानेपर मुख्यमन्त्री बघेलके घरके सामने आमरण अनशन


०१ जनवरी, २०२२
उत्तराखण्डके हरिद्वारमें आयोजित हुए धर्म संसदके प्रकरणमें महन्त यति नरसिंहानंद सरस्वती और एक अन्य सन्तपर प्राथमिकी प्रविष्ट की गई है । उत्तराखण्डके ‘पुलिस’ महानिदेशक अशोक कुमारके अनुसार, सार्वजनिक चलचित्रके आधारपर ये कार्रवाही हुई है । हरिद्वारमें १७-२० दिसम्बरको इस धर्म संसदका आयोजन हुआ था ।
उधर रायपुर धर्मसंसदमें गांधीजीपर दिए गए वक्तव्यको लेकर कालीचरण महाराजको मध्य प्रदेशसे बन्दी बनाए जानेपर भी यति नरसिंहानंद सरस्वतीने विरोध किया है । उन्होंने गांधीजीके विषयमें अयोग्य शब्दोंका प्रयोग करते हुए बोला कि कालीचरणको बन्दी बनानेवालोंका मां काली और महादेव विनाश कर देंगे । उन्होंने ये भी कहा कि यदि कालीपुत्र कालीचरण महाराजको शीघ्र मुक्त नहीं किया जाता है तो वे छत्तीसगढके मुख्यमन्त्री कांग्रेस नेता भूपेश बघेलके आवासपर जाकर आमरण अनशन करेंगे ।
वहीं इस प्रकरणमें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदीको भी १०० से अधिक बुद्धिजीवियोंने पत्र लिखकर साधु-सन्तोंके विरुद्ध कार्रवाहीकी मांग की है । साथ ही अधिवक्ताओंका एक समूह भी सर्वोच्च न्यायालयके मुख्य न्यायाधीश एनवी रमनाको पत्र लिखकर ऐसी आयोजनोंके स्वतः संज्ञान लेनेकी याचना कर चुका है । ७६ अधिवक्ताओंके इस समूहने ‘हिन्दू युवा वाहिनी’द्वारा आयोजित एक कार्यक्रमको लेकर भी आपत्ति जताई थी । हरिद्वारवाले कार्यक्रममें  डॉक्टर  मनमोहन सिंहको लेकर भी आपत्तिजनक
टिप्पणीके आरोप लगे हैं ।
      एक ओर देश विरोधी शक्तियां देशमें साम्प्रदायिक उपद्रव, युद्ध व तनावपूर्ण वातावरण बनानेमें सज्ज हैं, वहीं अन्य ओर तथाकथित, आदर्शहीन व विवेकहीन कथित बुद्धिजीवी हिन्दू समाज, साधु व सन्तोंपर भेदभाव व पक्षपाती व्यवहारकर देशको रसातलमें ले जानेमें अपनी श्रेष्ठता समझते हैं । क्या यही अधिवक्ता व तथाकथित बुद्धिजीवी भारत विरोधी ‘नारे’, उपद्रवों, आतङ्की घटनाओं व जिहादियोंके अपराधोंका मुखर होकर विरोध करते हैं ? यदि करते तो भारतवर्ष हिन्दू बहुल और अपराध मुक्त होता तथा विश्वके सभी राष्ट्रोंमें भी शान्ति होती । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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