‘चुप क्यों हैं प्रधानमन्त्री मोदी ? क्या यही है सबका साथ ?’ गीतकारसे ‘ट्रोल’ बने जावेद अख्तरने ‘बुल्ली बाई’को धर्मसंसदसे जोडा


०४ जनवरी, २०२१
      ‘बॉलीवुड’में कहानीकारसे गीतकार और ‘ट्विटर ट्रोल’तकका मार्ग निर्धारित करनेवाले जावेद अख्तरने एक बार पुनः हिन्दू-धर्म और ‘भाजपा’को लेकर अपनी अप्रसन्नता व्यक्त की है । अपने नूतन ‘ट्वीट’में जावेद अख्तरने कहा, “जहां एक ओर सहस्र महिलाओंकी ‘ऑनलाइन’ बोली लगाई जा रही है, वहीं दूसरी तरफ धर्मसंसद जैसे आयोजन किए जा रहे हैं । इनमें भारतीय सेना, ‘पुलिस’ और जनताको लगभग २० कोटि लोगोंके नरसंहारके लिए उकसाया जा रहा है ।”
      जावेद अख्तरने कहा कि वह स्वयं तथा अब अन्य लोग, इसपर मौनसे अत्यन्त चकित हैं, विशेषकर प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदीके ! साथ ही जावेद अख्तरने पूछा कि क्या यही सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास है ? इससे पूर्व भी उन्होंने धर्मसंसद और ‘ऑनलाइन’ मुसलमान महिलाओंकी ‘नीलामी’के आरोपको जोडते हुए कहा था कि धर्मसंसदोंने इसकी पुष्टि की है कि एक भीरुसे अधिक कोई दूसरोंकी पीडामें प्रसन्न होनेवाला और विकृत नहीं हो सकता है ।
      जावेद अख्तरने कहा कि ऐसे लोगोंके पास इतना साहस इसीलिए आता है; क्योंकि उन्हें सत्ताका संरक्षण प्राप्त है । इससे पूर्व उन्होंने पूर्व केन्द्रीय मन्त्री और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बलके उस वक्तव्यको ‘रीट्वीट’ किया था, जिसमें उन्होंने हरिद्वार धर्मसंसदके आरोपितोंको ‘यूएपीए’के अन्तर्गत बन्दी बनानेकी मांग की थी । सिब्बलने पूछा था कि इसपर प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेशके मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ मौन क्यों हैं ? इससे पूर्व उन्होंने उर्दू भाषाकी आलोचनापर भी आपत्ति व्यक्त की थी ।
        प्रधानमन्त्रीपर प्रश्न उठानेवाले जावेद अख्तरको गीतकारके स्थानपर बौद्धिक आतङ्कवादी कहना अधिक उचित होगा । जावेद अख्तर जैसे तथाकथित बुद्धिजीवी ही मुसलमान युवकोंको कट्टरताका पाठ पढाकर उन्हे आतङ्की गतिविधियोंकी ओर उन्मुख करते हैं तथा दोहरे मानदण्ड अपना मुसलमान महिलाओंका जीवन भी नारकीय बना रहे हैं । विधानके अन्तर्गत ऐसे व्यक्तियोंपर कडी कार्यवाहीकी जानी चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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