अब गुरुग्रामके झाडसा क्षेत्रमें समाधिको ‘कब्रिस्तान’ बताकर ‘मस्जिद’ निर्माणके प्रयास, भारत माता वाहिनीके विरोधके उपरान्त पीछे हटनेको विवश हुए मुसलमान


०४ जनवरी, २०२२
         गुरुग्राममें खुलेमें ‘नमाज’का विरोध तो हो ही रहा था, वहीं अब एक ऐसा प्रकरण उजागर हुआ है, जहां झाडसा ग्राममें एक समाधिको ‘मजार’ बताते हुए उसपर अधिकार जताकर ‘मस्जिद’ निर्माणके प्रयास हो रहे हैं । परिवादकर्ता भारत माता वाहिनीके संस्थापक अध्यक्ष दिनेश भारतीने बताया कि रात्रिमें शीघ्रतापूर्वक खेतमें बनी समाधिपर अधिकार करनेके प्रयासमें ४० से अधिक मुसलमान एकत्रित हो गए थे, जिसे किसीने देख लिया और सूचना फैलते ही प्रकरण बढ गया । हिन्दू नेताओंके विरोध और ‘पुलिस’की कार्यवाहीके कारण ‘राष्ट्रीय मुस्लिम मोर्चा’ एवं ‘इमाम’ सङ्गठनके पदाधिकारी अब्दुल हसीब कासमी सहित मुसलमानोंको पीछे हटना पडा । उन्होंने आगे बताया, “उस स्थानपर किसी वृद्ध रात्रि-प्रहरीकी (चौकीदारकी) मृत्युके उपरान्त समाधि बना दी गई थी । वहां मुसलमानोंने अपना अधिकार जताते हुए सूचना-पत्रमें (अखबारमें ) सूचना भी छपवा दी कि वें इस भूमिपर ‘मस्जिद’ निर्माण करने जा रहे हैं ।”
       हिन्दुओंने विरोध करते हुए लिखित परिवाद प्रविष्ट करवाया,  जिसके फलस्वरूप मुसलमानोंको पीछे हटना पडा ।
         इससे पूर्व मुसलमानोंने यह घोषणा की थी कि वे गत सोमवारको ही वहां ‘मस्जिद’ निर्माणका कार्य आरम्भ करेंगे । उन्होंने उन समाधियोंपर मुसलमानोंद्वारा की जा रही स्वच्छताका एक चित्रपट भी साझा किया था । इस प्रकरणमें पूर्व ‘पुलिस’ उपायुक्त मकसूद अहमदपर भी मुसलमानोंका साथ देनेका आरोप लगाया जा रहा है ।
       मुसलमान अवसर प्राप्त होते ही जहां चाहे ‘मजारें’ और ‘मस्जिदों’का निर्माणकर अपने ‘लैंड जिहाद’का उद्देश्य पूर्ण करते हैं । ‘पुलिस’ व शासन भी जबतक हिन्दू सङ्गठन विरोध नहीं करते तबतक हिन्दुओंकी सहायता हेतु निद्राधीन रहती है । एकजुट एवं सतर्क रहकर ही धर्मान्धोंसे अपने अधिकारोंकी रक्षाकी जा सकती है, इस प्रकरणसे यह सीखना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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