सर्वोच्च न्यायालयके अधिवक्ता गौरव गोयलने कहा, “तो हिन्दू धर्मके विषयमें अनुचित वक्तव्य देनेवाले राहुल गांधीको भी बन्दी बनाना पडेगा”
०७ जनवरी, २०२२
‘अभिव्यक्तिकी स्वतन्त्रता दोनों ओरसे हो, परन्तु हमारे देशमें वैसा होता हुआ दिखाई नहीं देता है । हिन्दू देवी-देवताओंका अनादर करनेवालोंको एक न्याय और गांधीजीके विचारोंसे असहमति दर्शानेवालोंके विरुद्ध दूसरा न्याय ? यह भेदभाव इस देशमें नहीं चलेगा । यदि कालीचरण महाराजद्वारा किया वक्तव्य अनुचित ठहराकर उन्हें बन्दी बनाना योग्य है, तो राहुल गांधीने भी अनेक बार हिन्दू धर्मके विषयमें अनर्गल वक्तव्य किए हैं । तो उन्हें भी बन्दी बनाना होगा’, ऐसा प्रतिपादन सर्वोच्च न्यायालयके अधिवक्ता गौरव गोयलने किया । हिन्दू जनजागृति समितिद्वारा आयोजित ‘हिन्दू देवी-देवताओंका अनादर अभिव्यक्ति; तो गांधीजीपर बोलना अपराध क्यों ?’ इस ‘ऑनलाइन’ विशेष संवादमें वे बोल रहे थे ।
इस समय बोलते हुए इतिहासके अध्येता तथा लेखक-अधिवक्ता सतीश देशपाण्डेने कहा, ‘राष्ट्रसे श्रेष्ठ कोई नहीं हो सकता । संविधानकी किसी भी धारामें अमुक किसी व्यक्तिको ‘राष्ट्रपिता’ सम्बोधित करें, ऐसा उल्लेख नहीं है । उसी प्रकार कोई व्यक्तिके रूपमें ‘राष्ट्रपिता’ होने चाहिए, ऐसी भी हमारे पास व्यवस्था नहीं है । गांधीजी अपने विवादास्पद जीवनकालमें मूलतः ही अलोकप्रिय थे; इसलिए वर्तमानकी अपेक्षा उनके जीवनकालमें उन्हें अधिक आलोचनाका सामना करना पडा था । गांधीजीपर टीका-टिप्पणी करनेका हमें पूर्ण अधिकार है । न्यायालयने वैसी छूट दी है । गांधीजीके कार्यका मूल्यमापन होना चाहिए ।’
‘राष्ट्रीय वारकरी परिषद’के प्रवक्ता ह.भ.प. अरुण महाराज पिंपळेने कहा, ‘अब तक छत्रपति शिवाजी महाराज, नेताजी सुभाषचंद्र बोस जैसे अनेक राष्ट्रपुरुषोंका अनादर इस देशमें किया गया; परन्तु केवल गांधीजीपर टीका-टिप्पणी करें तो उसे अपराध माना जाता है । संक्षेपमें, इस देशमें राष्ट्रप्रेमी नागरिक, साधु-सन्तोंके लिए एक विधान और राज्यकर्ताओंके लिए पृथक विधान है । हिन्दुओंद्वारा साधु-सन्तोंका समर्थन किया जाना आवश्यक है । छत्तीसगढके ‘सुदर्शन’ समाचार वाहिनीके ‘ब्यूरो’ प्रमुख श्री. योगेश मिश्रने कहा, ‘अभिव्यक्ति स्वतन्त्रतामें समान मापदण्ड होना चाहिए । कालीचरण महाराजको बन्दी बनाया जाना, उनपर लगाई गई धाराएं इस विषयमें छत्तीसगढ शासन एवं पुलिस-प्रशासनकी कार्रवाईपर ‘कानून’ विशेषज्ञोंने प्रश्नचिह्न उपस्थित किए हैं ।’ हिन्दू जनजागृति समितिके प्रवक्ता श्री. नरेंद्र सुर्वेने कहा, ‘हिन्दू देवी-देवताओंके नग्न चित्र बनानेवाले म.फि. हुसैनको कांग्रेसने पुरस्कार देकर सम्मानित किया था । हिन्दू देवी-देवताओंका अनादर करनेवाले मुनव्वर फारूकी जैसे कलाकारोंका कांग्रेस समर्थन करती है । कांग्रेस निरन्तर वीर सावरकरका अपमान करती है; परन्तु गांधीजीके विषयमें कोई प्रश्न उपस्थित करे, तो कांग्रेसको क्रोध आता है । हिन्दू एवं राष्ट्रप्रेमी नागरिक अनुचित बातोंपर प्रश्न उपस्थित करेंगे और उसके उत्तर सम्बन्धित लोगोंको देने ही पडेंगे !’
गांधीजीके आदर्श व आन्दोलन अवश्य ही सीमित स्तरपर सफल हुए; किन्तु अधिकांश अवसरोंपर और वे स्वयं भी विवश व पूर्णतः विफल रहे, विशेषतः जिहादियोंके हठीलेपन व अनुचित मांगोंके समक्ष, जिसकी परिणति स्वतन्त्र; किन्तु विभाजित भारतके रूपमें हुई । भारतवर्षके भौगोलिक विभाजनसे उसकी अन्तरात्माका विभाजन कदापि नहीं होता; क्योंकि वह एक ही है, इसी एकत्वकी प्राप्ति अर्थात अखण्ड एवं आध्यात्मिक भारतवर्षकी स्थापनाकी अभीप्सा प्रत्येक जीवात्मामें प्रत्यक्ष व परोक्षरूपसे विद्यमान है । खण्डित भारतमें वहांका जीवन अत्यधिक त्रस्त है, व्यापक क्षेत्रीय अस्थिरता है, आपदाएं हैं, विदेशी हस्तक्षेप हैं; अतः भारतवर्षमें हिन्दू राष्ट्र स्थापनार्थ महती दिव्य प्रयोजनमें सभीको बढ चढकर योगदान देनेके लिए कृतिशील होना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
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