‘जेडीयू’के नेता गुलाम रसूलने सूर्य नमस्कारका विरोध करते हुए कहा, “अल्लाहने सूरजको उत्पन्न किया, मुसलमान उसको नमस्कार नहीं कर सकते”


१० जनवरी, २०२२
‘बीजेपी’ने बिहारमें १२ जनवरीको सूर्य नमस्कार दिवस मनानेकी घोषणा की है । जिसका विरोध करते हुए ‘जेडीयू’के विधान परिषद सदस्य गुलाम रसूल बलियावीने बिना किसी तर्कके अपना वक्तव्य साझा किया है तथा कहा है कि वह इस कार्यक्रममें सहभागी नहीं हो सकते; क्योंकि इस्लाम उन्हें सूर्य नमस्कारकी आज्ञा नहीं देता । रसूलने कहा, “सूर्य नमस्कार एक धार्मिक परम्परा है, भारतीय संविधानमें    धार्मिक मान्यताएं मानने और न माननेकी पूर्ण स्वतन्त्रता है । हमारे संविधानमें कहा गया है कि जिसे जो ‘मजहब’ भाता हो, वह उसे स्वीकार करे ! ऐसेमें सूर्य नमस्कारको कोई अपना धार्मिक कृत्य मानता है तो माने, मैं इसपर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा ।” गुलामने यह भी कहा कि इस्लाममें मात्र ‘अल्लाह’को ही नमस्कार (सजदा) करनेके योग्य माना गया है । जिस वस्तुको ‘अल्लाह’ने ही उत्पन्न किया है, हम उसका नमस्कार (सजदा) नहीं करते । वहीं गत सप्ताह ‘ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’ने भी १ से ७ जनवरीके मध्य विद्यालयोंमें सूर्य नमस्कार आयोजित करनेके केन्द्र शासनके निर्णयपर आपत्ति जताई थी एवं इस निर्णयका विरोध करते हुए कहा था कि इस्लाम सूर्य नमस्कारकी आज्ञा नहीं देता । उल्लेखनीय है कि ‘मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’के महासचिव ‘मौलाना’ खालिद सैफुल्लाह रहमानीने अपना वक्तव्य साझा करते हुए कहा था कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष, बहुधार्मिक व बहुसांस्कृतिक देश है । इन्हीं सिद्धान्तोंपर हमारा संविधान लिखा गया है; परन्तु यह अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है कि वर्तमान शासन इस सिद्धान्तसे भटक रहा है ।
      सूर्य नमस्कार नहीं करनेका यह मात्र एक मिथ्याहेतु (बहाना) है, अन्यथा यह समुदाय ‘मज़ारों’को पूजता ही है । वस्तुतः यह वक्तव्य जिहादियोंकी भारतीय संस्कृतिसे घृणाको दर्शाता है, जिसका बोध हिन्दुओंको होना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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