तमिलनाडुमें अतिक्रमण करनेका असत्य कारण देकर, श्रीनरसिंह आंजनेय स्वामी मन्दिर प्रशासनने गिराया 


१२ जनवरी, २०२२
        तमिलनाडुमें मुदिचुरके निकट वरदराजपुरम्के पास जलमार्गपर बना श्रीनरसिंह आंजनेय स्वामी मन्दिर, राजस्व अधिकारियोंने अवैध घोषितकर गिरा दिया । ‘पुलिस’ने मन्दिर गिराए जानेका विरोध कर रहे लगभग २० हिन्दुओंको बन्दी बना लिया है । इस क्षेत्रमें अनेक अवैध निर्माण किए गए हैं; परन्तु, प्रशासनने उनके विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की है ।
       वरदराजपुरम्का श्रीनरसिंह आंजनेयर स्वामी मन्दिर ३० वर्ष पुराना है । वर्ष २०१५ में जिलाधीश अमुदाने मन्दिरका निरीक्षण किया था एवं प्रलेखोंकी जांचके पश्चात कहा था कि मन्दिर अतिक्रमणसे नहीं बना है; परन्तु नगर निगमके अधिकारी प्रतिवाद कर रहे हैं कि मन्दिर अतिक्रमित स्थानपर बनाया गया है। वर्ष २०१७ में इस क्षेत्रमें बाढ आई थी । जलमार्गके आसपास हुए इस मन्दिरके निर्माणके कारण पानीकी निकासी नहीं हुई है; इसलिए बाढ आ गई । ऐसा प्रशासकीय अधिकारी कह रहे हैं; किन्तु, हिन्दुओंने बताया है कि, यहां बाढ मन्दिरके कारण नहीं; अपितु,  अन्य अवैध निर्माणोंके कारण आई थी । शासनने इससे पूर्व दो बार यह मन्दिर गिरानेका प्रयास किया था; परन्तु भक्तोंके विरोधके कारण, ये प्रयास विफल हुए थे ।
       हिन्दूद्वेषी द्रमुक शासनके राज्यमें इससे भिन्न क्या होगा ? क्या आपने कभी तमिलनाडुमें किसी अवैध ‘मस्जिद’ अथवा ‘चर्च’ गिराए जानेके सम्बन्धमें सुना है ? तमिलनाडुमें हिन्दू संस्कृति, परम्परा एवं धरोहरको संरक्षित करनेके लिए प्रभावी हिन्दू संगठन अनिवार्य है । तमिलनाडुमें हिन्दूद्वेषी द्रमुक दलको चुननेका दण्ड हिन्दू भुगत रहे हैं । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 


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