‘मस्जिदों’के भोंपूओंसे होनेवाले ध्वनि प्रदूषणसे सामान्य जनता त्रस्त, इंदौरके अधिवक्ताओंने की प्रतिबन्धकी मांग
११ जनवरी, २०२२
मध्य प्रदेशके इंदौरमें अधिवक्ताओंने प्रशासनका ध्यान ‘मस्जिदों’पर लगे भोंपूओं और उससे होनेवाली समस्याओंकी ओर खींचा है । इस सम्बन्धमें ज्ञापन सौंपते हुए भोंपूओंओंके उपयोगपर प्रतिबन्धकी मांग की गई है । ये ‘लाउडस्पीर’ बिना किसी वैधानिक अनुमतिके लगाए गए हैं । इनसे होनेवाला ध्वनिप्रदूषण प्राणघातक है और इससे जनमानसको अत्यधिक कष्ट होता है । सोमवार, १० जनवरी २०२२ को इस सम्बन्धमें ‘पुलिस’ आयुक्तको सौंपे गए ज्ञापनपर ३०० अधिवक्ताओंने हस्ताक्षर किए हैं । नगरकी घनी बसावटवाले स्थानोंमें ‘मस्जिदों’से दिनमें अनेक बार ‘लाउडस्पीकर’से तीव्र स्वरमें अजान की जाती है । इससे सामान्य जनताको अत्यधिक कष्टका सामना करना पडता है । ‘मस्जिदों’से ध्वनिके मानकोंसे कहीं अधिक तीव्रताके साथ प्रदूषण किया जा रहा है ।
ईश्वर तो चींटीके पांवमें बंधे घुंघरूकी ध्वनि सुन लेते हैं, एक गिलहरीके सेतु निर्माणके योगदानके प्रति भी भगवान भाव विभोर हो जाते हैं । हिन्दू समाजकी शरणमें फल-फूल रहा मुसलमान समाज हिन्दुओंंकी व्यापकता और उदारताके प्रति कृतघ्न होकर सदैवसे ही उद्दण्डतापूर्वक वर्तन करता आ रहा है । तीव्र ध्वनि, अनियन्त्रित जनसंख्या वृद्धि व अस्वच्छतायुक्त वातावरणसे देशके सर्वसामान्य नागरिकों, वृद्धों, विद्यार्थियों, रुग्णों, शिशुओं व प्राणी जगतके चर-अचर जगतको हो रहे कष्टों व उनकी भावनाओंका आदर करना मुसलमान समाजको सीखना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
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