हितं यत् सर्वभूतानामात्मनश्च सुखावहम् ।
तत् कुर्यादीश्वरे ह्येतन्मूलं सर्वार्थ सिद्धये ॥
अर्थ : विदुर, धृतराष्ट्रसे कहते हैं : जो सम्पूर्ण प्राणियोंके लिए हितकर और अपने लिए भी सुखद हो, उसे ईश्वरार्पण बुद्धिसे करे; सम्पूर्ण सिद्धियोंका यही मूल मन्त्र है ।
भावमिच्छति सर्वस्य नाभावे कुरुते मनः ।
सत्यवादी मृदुर्दान्तो यः स उत्तम पूरुषः ॥
अर्थ : महर्षि दत्तात्रेय, साध्य देवताओंसे कहते हैं : जो सबका कल्याण चाहता है, किसीके अकल्याणकी बात मनमें नहीं लाता, जो सत्यवादी, कोमल और जितेन्द्रिय है, वह उत्तम पुरुष माना गया है ।
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