१० जनवरी, २०२२
लन्दन स्थित ‘खालिस्तानी’ संस्था ‘सिख फॉर जस्टिस’ने पंजाबके बठिंडा ‘फ्लाईओवर’पर प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदीका रक्षकदल रोके जानेका दायित्व लिया है । साथ ही इस सङ्गठनने दूरभाषकरके सर्वोच्च न्यायालयके लगभग ५० अधिवक्ताओंको चेतावनी भी दी है । सङ्गठनने अधिवक्ताओंको कहा, “इस प्रकरणको वे सर्वोच्च न्यायालयमें न चलाएं ।” इस सङ्गठनको शासनने २००७ से प्रतिबन्धित कर रखा है ।
इस प्रकरणसे पंजाबके कांग्रेस दलके शासनपर भी प्रश्न उठ रहे हैं । ‘पाकिस्तानी’ ‘खुफिया’ अभिकरण ‘आईएसआई’से सम्बन्ध रखनेवाले इस सङ्गठनका प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू है, जो पंजाबके सिखोंको उकसानेके लिए प्रायः चित्रपट साझा करता रहता है । ये ‘अलगाववादी’ सङ्गठन भारतको विभाजित करनेकी अभिलाषा रखता है । अधिवक्ताओंको दूरभाषपर कहा जा रहा है कि १९८४ सिख नरसंहारके पीडितोंको अबतक न्याय नहीं मिला है; इसीलिए ये प्रकरण न्यायालमें न चले ।”
देहलीमें कुछ समय पूर्व चले किसान आन्दोलनके समयसे ही, केन्द्रीय जांच अभिकरणोंने पंजाबके राज्य शासनको इस सङ्गठनके सक्रिय होनेकी जानकारी दी थी । पंजाब शासनकी निष्क्रियतासे यही सिद्ध होता है कि वह ऐसे सङ्गठनोंको प्रोत्साहित करती है । अधिवक्ताओंको यह प्रकरण सर्वोच्च न्यायालयमें चलानेके साथ ही इस सङ्गठनका समर्थन करनेवाले कांग्रेस दलके राजनेताओंको भी न्यायालयमें घसीटना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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