केरल नन दुष्कर्म प्रकरणमें पूर्व बिशप फ्रेंको मुलक्कलको न्यायालयने किया मुक्त


१४ जनवरी, २०२२
       केरलके कोट्टायममें बहुचर्चित नन दुष्कर्म अभियोगमें पूर्व बिशप फ्रेंको मुलक्कलको न्यायालयने प्रतिभूति दे दी है । न्यायालयने आज अपना निर्णय सुनाया । अतिरिक्त जनपद एवं सत्र न्यायालयके न्यायाधीश गोपाकुमारके न्यायालयमें इस अभियोगकी सुनवाई हुई । ननने २८ जून २०१८ को ‘पुलिस’में प्रकरण प्रविष्ट कराया था । इस प्रकरणमें जालंधरके पूर्व बिशप फ्रेंको मुलक्कल आरोपी थे । इस प्रकरणमें ८३ साक्षियों (गवाह) और ३० से अधिक साक्ष्योंके (सबूतोंके) आधारपर सुनवाई हुई थी । आरोपी पूर्व बिशप फ्रेंको मुलक्कलको २१ सितम्बर २०१८ में बन्दी बनाया गया था । इस प्रकरणमें अप्रैल २०१९ को आरोपपत्र प्रविष्ट किया गया था; यद्यपि ४० दिनोंके पश्चात उन्हें प्रतिभूति मिल गई थी । इस चर्चित प्रकरणकी सुनवाईके मध्य शुक्रवारको कोट्टायमके अतिरिक्त सत्र न्यायालयमें कठोर सुरक्षा व्यवस्थाकी गई थी । बिशपने अपने ऊपर लगे आरोपोंको काल्पनिक बताया था । न्यायालयसे मुक्त होनेके पश्चात फ्रैंकोने कहा, “भगवानका ‘बडप्पन’ है ।”
      फ्रेंको मुलक्कलके मुक्त होनेपर ‘सेव अवर सिस्टर फोरम’के संयुक्त संयोजक शायजू एंटनीने दु:ख जताया है । उन्होंने कहा कि यह अविश्वसनीय है । १०० प्रतिशत हम कोई ‘लीगल पॉसिबिलिटी’ नहीं छोडेगे । आगे लडाई लडेंगे ।
      पीडिताने ‘पुलिस’को बताया था कि फ्रेंकोने सबसे पहले २०१४ में हिमाचल प्रदेशके एक ‘गेस्ट हाउस’में उसका यौन शोषण किया था । आरोपीने २ वर्षमें १४ बार दुष्कर्म किया; यद्यपि ३ वर्ष पूर्व पीडिताकी सन्दिग्ध परिस्थितियोंमें मृत्यु हो चुकी है । इसके पश्चात यह प्रकरण और गम्भीर हो गया ।
     उक्त प्रकरणसे सिद्ध होता है कि ईसाइयोंका प्रभाव हमारी न्यायव्यवस्था पर भी अत्यन्त दृढ है, जो देशके हितमें नहीं है । फ्रेंको मुलक्कलको जबतक दण्ड न मिले, तबतक सत्र न्यायायके इस निर्णयको अन्य न्यायालयोंमें चुनौती अवश्य देनी चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 


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