बाल यौन शोषणके ४ प्रकरणोंमें दोषी पादरियोंके विरुद्ध पूर्व ‘पोप’ बेनेडिक्टने नहीं की कार्रवाई, जर्मन विवरणीमें प्रतिवाद


२२ जनवरी, २०२२
          जर्मनीकी एक वैधानिक अभिकरणने पूर्व ‘पोप’ बेनेडिक्टपर यौन शोषणके चार प्रकरणोंमें उचित कार्यवाही न करनेका आरोप लगया है । यह घटनाएं १९७० से १९८० के मध्यकी अवधि हैं । उस समय ‘पोप आर्कबिशप’ थे । अभिकरणने इस विषयमें स्वयं पूर्व ‘पोप’का वक्तव्य भी प्रविष्ट किया था । ‘पोप’ने अपने ऊपर लगे दोषोंका खण्डन करते हुए कहा था कि उन्होंने किसी प्रकारकी चूक नहीं की ।
          १९७७ से १९८२ तक म्यूनिचके ‘आर्कबिशप’के रूपमें अपने कार्यकालके समय, ‘बेनेडिक्ट’ने ‘पीटर हॉलरमैन’को एसेनसे म्यूनिच स्थानान्तरित किया था । एसेनमें पादरीपर ११ वर्षके बालालके साथ दुर्व्यवहार करनेका दोष लगाया गया था । पीटरको १९८६ में बच्चोंका यौन शोषण करनेका दोषी ठहराया गया था और उसे आजीवन कारावासका दण्ड सुनाया गया था । दोष है कि उसके पश्चात भी कुछ वर्ष बेनेडिक्टके संरक्षणमें पादरीने बच्चोंके साथ कार्य किया । २०१८ में जर्मनीमें बिशप्स सम्मेलनमें किए गए एक अध्ययनमें पाया गया कि १९४६ और २०१४ के मध्य जर्मनीमें १,६७० पादरियोंद्वारा ३,६७७ अवयस्कोंका यौन शोषण किया गया ।
        मात्र जर्मनी ही नहीं; विश्वभरमें पादरियोंपर यौन शोषणके आरोप सामने आते हैं और ‘पोप’भी उनका बचाव करते हैं; किन्तु उनपर अपेक्षित कार्यवाही नहीं होती । इसके विपरीत हिन्दू सन्तोंपर असत्य आरोप लगाकर, तथाकथित बुद्धिवादी और हिन्दू विरोधी पत्रकार उस प्रकरणको बढा-चढाकर प्रचारित करते हैं । पादरियों और उनके दुराचारी प्रवृत्तिको समझ अब हिन्दू धर्मको छोडकर ईसाई बने लोग पुनः घर ‘वापसी’पर (हिन्दू धर्मको अपनानेपर) विचार करें ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ


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