यति नरसिंहानंदकी प्रतिभूतिका आवेदन पुनः किया अस्वीकार, मुसलमान महिलाओंपर ‘अपमानजनक’ टिप्पणीको हरिद्वार न्यायालयने बताया गम्भीर घटना
२० जनवरी, २०२२
उत्तराखंडके कारागृहमें बन्द उत्तर प्रदेशके डासना देवी मन्दिरके महन्त यति नरसिंहानंदकी समस्याएं न्यून नहीं हो रही हैं । मुसलमान महिलाओंपर तथाकथित अभद्र टिप्पणीके प्रकरणमें हरिद्वारकी ‘सीजीएम’ न्यायालयने उनके आवेदनको निरस्त करते हुए उन्हें प्रतिभूति देनेसे मना कर दिया ।
कथित रूपसे नरसिंहानंदने कहा था कि मुसलमानोंने सब कुछ अधिग्रहित (कब्जा) कर लिया है । वे भारतीय जनता पार्टीमें सम्मिलित हो गए हैं, ‘आरएसएस’पर ‘कब्जा’ कर लिया है । उन्होंने कहा था कि इस्लामकी सेवाके लिए उनकी (मुसलमानोंकी) महिलाएं अपने पुरुषकी ‘मिस्ट्रेस’के रूपमें कार्य करती हैं और वही महिलाएं उनकी सबसे बडी शक्ति हैं ।
नरसिंहानंदके विरुद्ध भारतीय दण्ड संहिता (IPC) की धारा २९५ (ए) और ५०९ के अन्तर्गत प्रकरण प्रविष्ट किया गया है । ‘सीजेेएम’ मुकेश आर्यने कहा कि आरोपितके विरुद्ध गम्भीर प्रकृतिके अपराध हैं । उन्होंने आगे कहा, “सीआरपीसीकी धारा ४१ (ए) के अन्तर्गत सूचना प्रकाशित करनेके पश्चात आवेदनकर्ताने (नरसिंहानंदने) ‘सोशल मीडिया’के माध्यमसे धार्मिक भावनाओंको भडकाकर साम्प्रदायिक सौहार्द्र बिगाडनेका प्रयास किया है ।”
न्यायालयको केवल एक यति नरसिंहानंदके ही वक्तव्य दिखाई देते है, अन्योंके नहीं ! ये भ्रष्ट न्यायप्रणाली धर्मविहीन हो चली है और न्यायके अधिकारी केवल एक पक्षके प्रति कठोर होते देखे जा सकते हैं । ऐसा केवल हिन्दू बहुल देश भारतमें ही सम्भव है; अतः इस निर्णयके विरुद्ध सभी हिन्दुओंको मुखर होकर स्वर उठाना होगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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