जिहादी संगठन ‘एसडीपीआई’के धर्मान्ध राजनेताकी प्रतिभूति याचिकाको कर्नाटक उच्च न्यायालयने किया निरस्त


२० जनवरी, २०२२
          बेंगलुरु जनपदमें अगस्त २०२० में पूर्वी बेंगलुरुमें हुई हिंसाके प्रकरणमें कर्नाटक उच्च न्यायालयने ‘सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया’के (एसडीपीआई’के) राजनेता इमरान अहमदकी प्रतिभूति याचिका निरस्त कर दी है । कर्नाटक उच्च न्यायालयकी खण्डपीठने कहा है कि अहमदके विरुद्ध प्रविष्ट किए गए आरोपपत्रको देखते हुए उसपर लगाए गए आरोप स्वीकार करनेके लिए पर्याप्त हैं । इससे पूर्व राष्ट्रीय अन्वेषण विभागकी विशेष न्यायालयने भी अहमदकी प्रतिभूति याचिका निरस्त की थी; इसलिए अहमदने अब याचिका कर्नाटक उच्च न्यायालयमें प्रविष्ट की थी । उल्लेखनीय है कि अगस्त २०२० में कांग्रेसके विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्तिद्वारा प्रेषित ‘पैगम्बर’ मोहम्मद के विषयमें ‘फेसबुक’पर कथित रूपसे आपत्तिजनक टिप्पणी प्रसारित करनेके कारण धर्मान्ध क्षुब्ध हुए थे व इसके विरुद्ध प्रदर्शन करनेके लिए श्रीनिवास मूर्तिके आवासके समक्ष एकत्रित हुए थे । तदुपरान्त एकत्रित हुई भीड हिंसक बन गई थी तथा श्रीवासके घरपर आक्रमणकर हिन्दुओंकी सम्पत्तिको लक्ष्य करते हुए नष्ट किया गया था । ‘पुलिस’ने भी भीडको रोकनेका पूरा प्रयास किया था । इसी प्रकरणमें ‘पुलिस’ने अहमद नामके व्यक्तिको बन्दी बनाया था ।
       उच्च न्यायालयद्वारा लिया गया निर्णय योग्य है; परन्तु ऐसे राष्ट्रद्रोहियोंको उनके कुकृत्योंपर शीघ्र अति शीघ्र कठोर दण्ड दिया जाना चाहिए, जिससे अन्य जिहादियोंके मनमें भी भयका निर्माण हो व राष्ट्रकी सम्पत्तिको नष्ट करनेसे पूर्व‌ वे भी पुनः पुनः सोचें ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ


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