शास्त्र वचन


श्वः   कार्यमद्य   कुर्वीत   पूर्वाह्णे   चापराह्णम् ।

न हि प्रतीक्षते मृत्युः कृतमस्य न वा कृतम् ॥

अर्थ : कल किया जानेवाला कार्य आज ही पूर्ण कर लेना    चाहिए । जिसे सायंकालमें करना है, उसे प्रातःकालमें ही कर लेना चाहिए; क्योंकि मृत्यु यह नहीं देखती कि इसका कार्य अभी पूर्ण हुआ कि नहीं ।

आक्रुष्टस्ताडितः क्रुद्धः क्षमते यो बलीयसा ।

यस्य  नित्यं जितक्रोधो विद्वानुत्तमपूरुषः ॥

अर्थ : युधिष्ठिर कहते हैं : हे द्रौपदी ! जो बलवान पुरुषके अपशब्द बोलने या कुपित होकर मारनेपर भी, क्षमा कर जाता है तथा जो सदा अपने क्रोधको नियन्त्रणमें रखता है, वही विद्वान है और वही श्रेष्ठ पुरुष है ।



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