महाद्रिपार्श्वे च तटे रमन्तं सम्पूज्यमानं सततं मुनीन्द्रैः ।
सुरासुरैर्यक्षमहोरगाद्यै: केदारमीशं शिवमेकमीडे ॥
अर्थ : जो भगवान शंकर पर्वतराज हिमालयके समीप मन्दाकिनीके तटपर स्थित केदारखंड नामक शृंगमें निवास करते हैं तथा मुनीश्वरोंके द्वारा सदा पूजित हैं, देवता-असुर, यक्ष-किन्नर व नाग आदि भी जिनकी सदा पूजा किया करते हैं, उन्हीं अद्वितीय कल्याणकारी केदारनाथ नामक शिवकी मैं स्तुति करता हूं ।
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