भारतके मानचित्र और राष्ट्रध्वजका निरन्तर अपमान करनेपर ‘एमेजोन’पर तत्काल कार्यवाही करें, हिन्दू जनजागृति समिति


 फरवरी, २०२२
‌भारतका राष्ट्रध्वज और भारतका मानचित्र अर्थात ‘नक्शा’ यह कोटि-कोटि भारतीयोंकी राष्ट्रीय अस्मिताका विषय है । राष्ट्रध्वजके उपयोगके सम्बन्धमें ‘ध्वजसंहिता’में नियम दिए गए हैं । उनका उल्लङ्घन करना अपराध है । भारतके मानचित्रका विकृतीकरण करना भी अपराध है । ऐसा होते हुए ‘एमेजोन कम्पनी’ ध्वजसंहिताका उल्लङ्घन करते हुए भारतका राष्ट्रध्वज छपे ‘टी-शर्ट’, जूते आदि उत्पादन तथा विकृतीकरण किए हुए भारतके मानचित्रके ‘विनाइल स्टीकर्स’का विक्रय जालस्थलद्वारा (वेबसाइटद्वारा) कर रही   है । इससे पूर्व अनेक बार ‘एमेजोन’को इस सम्बन्धमें सूचित किया गया है; परन्तु वह किसी प्रकारका परिवर्तन न करते हुए वस्तुएं विक्रय कर रही है । भारतीय राष्ट्रीय प्रतीकोंका निरन्तर अपमान करनेवाली ‘एमेजोन’की यह ‘मुंहजोरी’ अब रोकनी ही चाहिए । जबतक ‘एमेजोन कम्पनी’ भारत शासन और भारतीय जनतासे सार्वजनिक क्षमायाचना नहीं करती, तबतक ‘एमेजोन कम्पनी’का बहिष्कार किया जाए, ऐसा आवाहन करते हुए भारत शासन ‘एमेजोन’पर तत्काल विधानके अनुसार कार्यवाही करे, ऐसी मांग हिन्दू जनजागृति समितिके ‘सुराज्य अभियान’द्वारा केन्द्रीय गृहमन्त्री मा. श्री. अमित शाहसे की है । इससे सम्बन्धित एक निवेदन माननीय गृहमन्त्रीको भेजा गया है ।
इस निवेदनमें कहा गया है कि भारतके मानचित्रसे पाक अधिकृत और चीन अधिकृत कश्मीरका भूभाग हटा हुआ भारतका मानचित्र छपे हुए ‘विनाइल स्टीकर्स’ तथा   अशोकचक्र सहित तिरंगा छपे हुए ‘टी-शर्ट’ और पदत्राण बेचनेका ‘एमेजोन’का यह कार्य पहली बार ही नहीं है ।
       इससे पूर्व भी ‘एमेजोन’ने राष्ट्रध्वजके समान ‘तिरंगा  मास्क’, ‘तिरंगा टोपी’ आदि उत्पादनोंका विक्रय करते हुए राष्ट्रध्वजका अनादर किया है । कुछ दिनों पूर्व तो ‘ऐमेजोन’पर ‘गांजा’की बिक्री हुई है, यह भी उजागर हुआ था । इस सन्दर्भमें समितिने ‘सुराज्य अभियान’की ओरसे केन्द्र शासनसे परिवाद किया था ।
            राष्ट्रीय प्रतीकोंका दुरुपयोग एक दण्डनीय अपराध है । एमेजोन प्रतिष्ठानपर शासन कठोर कार्यवाही  करे, प्रत्येक भारतवासीकी मांग है । यदि शासनने विधानके अनुसार कार्यवाही नहीं की, तो ऐसा लगेगा  कि भारतीय विधान निरुपयोगी हैं तथा कोई भी  राष्ट्रध्वज और मानचित्रका अपमान करनेका साहस करेगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 


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