नैनीताल घूमनेके छल करके नावेद और नदीमने अपने धर्मान्ध मित्रोंको लेकर दो युवतियोंसे किया दुष्कर्म


४ फरवरी, २०२२
       बरेलीमें दो अनुसूचित जातिकी युवतियोंसे दो धर्मान्ध आरोपितोंने दुष्कर्म किया । आरोपितोंने जालमें युवतियोंको फंसानेके पश्चात नैनीताल घूमनेका षड्यन्त्र किया । नगरसे ‘कार’में नावेद और नदीमने तीन युवतियोंको लेकर नैनीतालके लिए निकले । मार्गमें भोजीपुरासे ‘कार’में आरोपितोंके दो मित्र इरफार और साजिद भी साथ हो गए । इसके पश्चात एक भोजनालयपर खाना खाया । युवतियोंका आरोप है कि खाना खाते ही उन्हें ‘नशा’ होने लगा, इसके पश्चात नावेदने एक युवतीसे चलती ‘कार’में दुष्कर्म किया । सुधमें आई तो देखा कि नैनीतालके एक ‘गेस्ट-हाउस’में हम तीनोंको बन्धक बना लिया गया था । वहां नदीमने उनकी सहेलीसे दुष्कर्म किया ।
      विरोध करनेपर तीनोंको कक्षमें बन्द रखा । सोमवार सवेरेको किसी प्रकार कक्षसे निकलकर ‘गेस्ट-हाउस’ संचालकको बताया और वहींके दूरभाषसे स्वजनको जानकारी दी । ‘गेस्ट-हाउस संचालकने आरोपितोंको केवल पृथक कक्षमें रहनेका परामर्श दिया । इसके पश्चात चला गया । इस मध्य आरोपितोंको फंसनेका भय सताया तो तीनों वहांसे भाग गए । सांयकालको स्वजन पहुंचे, तब वहां ‘नशे’में ‘धुत्त’ इरफान मिला । उसके साथियोंकी जानकारी और कार्यवाहीके लिए युवतीके स्वजन रात्रितक रुके । सुनवाई नहीं होती देखी तो मंगलवार तडके वहांसे चल दिए ।
     युवतीने बताया कि मंगलवार सवेरे परिजन इरफानको लेकर बरेली आ रहे थे । उसके हाथ रस्सीसे बांधे गए थे, जिससे वह भाग न सके । बहेडी पहुंचनेपर उसने रस्सी किसी प्रकार खोली और मेरे गलेमें कस दी । हत्याका प्रयास किया । स्वजनने बचाया तो इरफानने आक्रमण कर दिया । हाथापाई बढती देख चालक ‘कार’को सीधे ‘थाने’ ले गया । वहां इरफानको ‘पुलिस’को सौंप दिया । निरीक्षक सुनीलने बताया कि चारों आरोपितोंपर दुष्कर्म, बन्धक बनाने, ‘एससी-एसटी’ विधानमें अभियोग प्रविष्ट किया गया है ।
      नावेद, नदीम समेत चारोंके विरुद्ध अभियोग प्रविष्ट किया गया । ‘पुलिस’ने दो आरोपितोंको बन्दी बना लिया, जबकि दो भागेडे हैं ।
       पीडिता भले ही अनुचूचित जातिसे हो लेकिन जब दुष्कर्मी धर्मान्ध जिहादी होते हैं, तब सभी राजनीतिक दल और तथाकथित वामपन्थी बुद्धिजीवी एवं सभी प्रकारकी समाचार वाहिनियां एक रहस्यमयी मौन साध लेते हैं, जो कि निश्चय ही चिन्ताका विषय है । अपराधीको धर्म और जातिके आधारपर नहीं देखा जाना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ


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