‘मौलाना’ने कहा, ‘हजरत आदम’ हिन्दुओंके पिता तत्पश्चात ‘फेसबुक’पर चित्रपट डाला, उच्च न्यायालयने प्राथमिकी निरस्त करनेसे किया मना


१० फरवरी, २०२२
इलाहाबाद उच्च न्यायालयने ८ फरवरी २०२२ को ‘सोशल मीडिया’पर सार्वजनिक हुए एक चित्रपटको लेकर प्रविष्ट प्राथमिकी निरस्त करनेसे मना कर दिया । इस चित्रपटमें एक अज्ञात ‘मौलाना’ने हिन्दुओंके विरुद्ध घृणित और अपमानजनक वक्तव्य दिया था । ‘मौलाना’ने टिप्पणीकी थी कि ‘हजरत आदम हिन्दुओंके पिता’ हैं । न्यायालयने याचिकाकर्ताओंके इस कथनको निरस्त कर दिया कि उनके विरुद्ध आरोप व्यर्थ थे और ऐसा कोई चित्रपट कभी प्रसारित नहीं किया गया । न्यायालयने कहा कि इस प्रकारके सार्वजनिक चित्रपटमें कोई आपत्तिजनक सामग्री है अथवा नहीं, इसकी जांच अभिकरणोंद्वारा कराए जानेकी आवश्यकता है ।
 प्रकरणमें महेश पांडे नामके व्यक्तिने प्राथमिकी प्रविष्ट करवाई थी । उनके परिवादके आधारपर तत्काल परिवादकर्ता शकील खान सहित कई लोगोंके विरुद्ध प्रकरण प्रविष्ट किया गया था । महेश पांडने आरोप लगाया था कि २३ अक्टूबर २०२१ को ‘फेसबुक’ चलाते समय उनकी दृष्टि एक चित्रपटपर पडी । इसमें एक ‘मौलाना’द्वारा हिन्दू समुदायके लोगोंके विरुद्ध उकसानेवाले और अपमानजनक वक्तव्य दिए गए थे। यह चित्रपट उत्तर प्रदेशके चित्रकूटके रायपुर गांवमें जाबिर खानद्वारा आयोजित कार्यक्रमका था । प्रकरणमें खान सहित अन्य आरोपितोंके विरुद्ध ‘आईपीसी’की धारा २९५-ए, ५०५ (२) और सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम, २००८ की धारा ६६ के अन्तर्गत प्रकरण प्रविष्ट किया गया है ।
      कुछ सौ वर्षों पूर्व उत्पन्न हुआ यह आसुरी पन्थ, कदाचित यह भूल गया कि उनके पूर्वज हिन्दू ही थे । हिन्दुओंकी धर्मिक भावनाओंको अपमानित करनेवाले इन धर्मान्धोंको न्यायालय कठोर दण्ड सुनाएं, ऐसा हिन्दुओंको अपेक्षित है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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