२२,८४२ कोटिका (करोडका) घोटाला, नीरव मोदीके पश्चात भारतका सबसे बडा अधिकोष छल, २०१२-१७ के धोखाधडीपर ‘सीबीआई’ने प्रविष्ट किया प्रकरण


१२ फरवरी, २०२२
      जलपोत (जहाज) बनानेवाले प्रतिष्ठान ‘एबीजी शिपयार्ड’के ऊपर सीबीआई’ने सबसे बडे अधिकोष धोखाधडी प्रकरणमें कार्यवाही की है । प्रतिष्ठानपर आरोप है कि उन्होंने विभिन्न अधिकोषोंके साथ कुल २२,८४८ कोटि धनराशिकी ‘धोखाधडी’ की और अधिकोषसे लिए धनका अनुचित उपयोग किया । ‘सीबीआई’ने ‘एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड’के तत्कालीन अध्यक्ष ऋषि अग्रवाल सहित अन्यके विरुद्ध इस प्रकरणको प्रविष्ट किया है । ‘फॉरेंसिक’ जांचसे ज्ञात हुआ है कि २०१२-१७ के मध्य, प्रकरणके आरोपितोंने एक साथ मिलीभगत की और अधिकोषोंसे ली हुई धनराशिमें हेराफेरी की और आपराधिक विश्वासघातमें लगे रहे । इस प्रकरणमें लगभग २८ अधिकोष और वित्तीय संस्थान प्रभावित हुए हैं । इनका कहना है कि इनसे जो धनराशि ली गई, उनका उपयोग किसी और कार्यके लिए किया जाता रहा ।
    ‘भारतीय स्टेट बैंक’ने घोटालेको लेकर प्रतिवाद प्रविष्ट करवाया और बताया कि ‘एबीजी शिपयार्ड’ प्रतिष्ठानपर उसका २,९२५ कोटि रुपए शेष है । इसके अतिरिक्त अन्य अधिकोषोंके भी सहस्रों करोड रुपए शेष हैं । ‘एबीजी शिपयार्ड’ जलपोत निर्माण और उन्हें ठीक करनेका कार्य करती है । इसके पोत प्रांगण (शिपयार्ड) गुजरातके दहेज और सूरत में स्थित है ।  ‘एबीजी शिपयार्ड’से सम्बन्धित ‘धोखाधडी’ इतनी बडी है कि इससे पूर्व केवल नीरव मोदी ही थे जिनके १३,२०० कोटि रुपएके छलको सबसे बडा कपट कहा जाता था ।
       राष्ट्रके धनकी इस प्रकार हानि करनेवाले प्रतिष्ठानोंपर कठोर कार्यवाही होनी चाहिए । अधिकोषोंद्वारा भी ऐसे प्रतिष्ठानोंको धनराशि उपलब्ध करवानेसे पूर्व उनकी योग्य जांच हो । इस धनराशिका उपयोग कहीं शत्रुराष्ट्रोंके लिए तो नहीं हुआ, इसकी भी शासन जांच अभिकरणोंद्वारा प्रामाणिकतासे जांच कराएं ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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