विश्वका सबसे बडा ‘मुसलमानी’ देश, जहां ‘हिजाब’को गणवेशका भाग बनानेपर स्कूलोंको मिलता है दण्ड, इंडोनेशियामें है प्रतिबन्ध
१४ फरवरी, २०२२
कर्नाटकके मुसलमानोंका हठ है कि उनके घरकी छात्राएं ‘बुर्का’ पहनकर विद्यालय-महाविद्यलयोंमें जाएं और शैक्षणिक संस्थानमें गणवेशके निश्चित नियमोंकी ‘धज्जियां’ उडाएं । इसे मुसलमान पन्थमें अनिवार्य बताते हुए, कर्नाटक उच्च-न्यायालयमें भी वाद-विवाद किए जा रहे है; किन्तु इस मध्य वह यह विस्मरण कर गए कि विश्वके सबसे बडे ‘मुसलमानी’ देश इंडोनेशियाने विद्यालयोंपर ‘हिजाब’को अनिवार्य बनानेसे प्रतिबन्धित कर रखा है । वहां ‘गैर’ मुसलमानोंको ‘हिजाब’के लिए बाध्य किए जानेके पश्चात देशभरमें विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिसके पश्चात ये नियम बनाने पडे ।
इंडोनेशियाके २० से अधिक प्रान्तोंमें कई विद्यालयोंने ‘हिजाब’को विद्यालयमें छात्राओं गणवेशके (यूनिफॉर्मके) अन्तर्गत अनिवार्य बना रखा था । ये नियम न केवल छात्राओं; अपितु महिला शिक्षकोंके लिए भी था । इंडोनेशियामें आधिकारिक रूपसे ६ धर्मोंको (पन्थोंको) मान्यता प्राप्त है; किन्तु वहांकी ८६.७% मुसलमान जनसंख्या है । अब वहांके विद्यालय किसी धार्मिक वस्त्रको ‘यूनिफॉर्म’का भाग नहीं बना सकते । पश्चिमी सुमात्राके एक विद्यालय ‘गैर’ मुसलमानोंको भी ‘हिजाब’ पहननेको कहा था, जिसके पश्चात यह विवाद आरम्भ हुआ था ।
इनमेंसे एक युवतीके माता-पिताने विरोध प्रदर्शन आरम्भ किया, जो समूचे देशतक फैल गया था । तत्पश्चात, फरवरी २०२१ में वहांके शासनने कठोर पग उठाए । इंडोनेशियाके धार्मिक घटनाओंके मन्त्री याकूत चोलिल कौमासने कहा था कि पश्चिमी सुमात्राका प्रकरण तो केवल दिख रहा था; किन्तु ऐसे कई और प्रकरण आए थे । उन्होंने कहा था कि धर्मके नामपर किसी दूसरे व्यक्तिकी स्वतन्त्रताका वध नहीं किया जा सकता । एक ईसाई युवतीको ‘हिजाब’ पहननेके लिए विवश किए जानेके एक दृश्यपटके पश्चात वहांके शासनने इतना बडा निर्णय ले लिया था ।
धर्मान्ध जिहादी कट्टर सोचसे देशको बन्धक बनाना चाहते है और समूचे देशमें आन्दोलन करके बहुसंख्यक हिन्दुओंमें भय भी उत्पन्न करना चाह रहे हैं, जबकि आन्दोलनका नेतृत्व कर रहे अधिकांश जिहादियोंकी स्वयंकी सन्तान विदेशोंमें अध्ययनरत हैं और पश्चिमी संस्कृतिका अनुकरण करते है । शासनको चाहिए कि इनके विरुद्ध कठोर कार्यवाही करे ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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