विद्यालयमें छात्रासे सिन्दूर हटानेको कहा, ‘बुर्का’ विवादपर छात्राओंने पूछा, “टिकटॉक दृश्यपट बिना ‘हिजाब’के, तो शिक्षा ‘पर्दे’में क्यों ?”
१९ फरवरी, २०२२
कर्नाटकमें ‘बुर्के’पर जारी विवादके मध्य एक ऐसा प्रकरण सामने आया है, जिसमें सिन्दूर लगाकर आई छात्राको विद्यालयमें प्रवेश देनेसे मना कर दिया गया । दूसरी ओर एक ‘वीडियो’ सामने आया है, जिसमें छात्राओंने ‘हिजाब’का समर्थन करनेवालोंपर प्रश्न उठाया है और पूछा है कि जब ‘टिकटॉक’ दृश्यपट वह बिना ‘हिजाब’के डालती हैं, तो शिक्षा ‘पर्दे’में क्यों करना चाहती हैं ?
प्रतिवेदनके अनुसार, विजयपुरामें एक छात्राको सिन्दूर लगाकर आनेके कारण प्रवेश देनेसे मना कर दिया गया । विद्यालय परिसरमें प्रवेशसे पूर्व उसे सिन्दूर हटानेके लिए कहा गया । घटना शुक्रवार, १८ फरवरी २०२२ की है । विद्यालय प्रशासनको आशङ्का थी कि माथेपर सिन्दूर, ‘हिजाब’ और भगवा ‘शॉल’की भांति समस्या उत्पन्न कर सकता है ।
कर्नाटक उच्च न्यायालयने विवादपर अन्तरिम आदेश आनेतक शैक्षणिक संस्थानोंमें धार्मिक गणवेशपर रोक लगा रखी है; किन्तु इस प्रकरणकी सुनवाईके मध्य याचिकाकर्ताओंके अधिवक्ता हिन्दू युवतियोंद्वारा सिन्दूर लगाने, चूडियां पहनने, सिखोंद्वारा पगडी पहनने और रुद्राक्ष पहननेके तर्क देते हुए ‘हिजाब’को भी अनुमति देनेका निवेदन कर चुके हैं । समाचार संस्थानोंके प्रतिवेदनके अनुसार, न्यायालयने अपने आदेशमें माथेपर सिन्दूर लगानेसे नहीं रोका है ।
प्रकरण जब न्यायालयमें विचाराधीन है, तब विद्यालय प्रशासनपर न्यायालयके आदेश नहीं माननेके लिए कार्यवाही होनी चाहिए और अपने मनसे नियम बनाकर आशङ्काके नामपर आदेश देनेसे भी रोका जाना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
Leave a Reply