‘बीएचयू’में आयोजित प्रदर्शनीमें प्राचार्यने भगवान राम-सीताके स्थानपर लगाया अपना और पत्नीका छायाचित्र
१५ फरवरी, २०२२
वाराणसी स्थित काशी हिन्दू विश्वविद्यालयमें दृश्य कला संकायकी चित्रकला प्रदर्शनीमें आयोजित भगवान राम और सीताके चित्रमें उनके मुखके स्थानपर एक सहायक प्राचार्यद्वारा स्वयंकी और पत्नीका चित्र लगाए जानेका प्रकरण सामने आया है । हिन्दू संस्कृति परम्परा और धार्मिक आस्थाको आघात पहुंचानेके आरोपमें छात्रोंने विरोध प्रविष्ट कराया है । साथ ही सहायक प्राध्यापकपर विश्वविद्यालय प्रशासनद्वारा दण्डात्मक कार्यवाही करनेका अनुरोध किया है ।
काशी हिन्दू विश्वविद्यालयके दृश्य कला संकायमें ५ फरवरीसे शिक्षकों सहित ४६ कलाकारोंद्वारा चित्रकला प्रदर्शनी आयोजित की गई हैं । इसीमें से एक चित्रमें यहांके सहायक प्राध्यापकने भगवान राम और सीताके चित्रमें अपना और अपनी पत्नीका मुख लगा दिया । काशी हिन्दू विश्वविद्यालयके एक छात्र नेताने कहा, “इस चित्रसे सनातन धर्मका उपहास किया गया है । सनातन मूल्य और हिन्दू परम्पराको माननेवाले लोग इसको कभी सहन नही करेंगे ।” छात्रोंने प्रशासनद्वारा कार्यवाही न करनेपर विरोध-प्रदर्शन करनेकी बात कही है ।
काशी हिन्दू विश्वविद्यालयके सहायक प्राध्यापक ही यदि इस प्रकारकी कृति करेंगे, तो उनकेद्वारा दी गई शिक्षा कैसी होगी ? वर्तमानमें धर्मका ज्ञान न होनेके कारण उनकी उच्च शिक्षाका भी कोई मूल्य नहीं है । ऐसे सहायक प्राध्यापक शीघ्र ही अपनी चूकके लिए क्षमा मांगे और सर्वप्रथम स्वयं धर्म शिक्षा ग्रहण करें ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
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