कश्मीरमें ‘जैश’के ‘स्लीपर सेल’के १० बन्दी, युवाओंको आतङ्की बनाने, पैसे जुटाने और अस्त्र-शस्त्र पहुंचानेमें थे सम्मिलित


१६ फरवरी, २०२२
       जम्मू-कश्मीर ‘पुलिस’के प्रदेश गुप्तचर अभिकरण (खुफिया एजेंसी) ‘एसआईए’ने आतङ्कवादी संगठन ‘जैश-ए-मोहम्मद’के लिए कार्य करनेवाले १० लोगोंको बन्दी बनाया गया है । ‘एसआईए’ अधिकारियोंने कश्मीरके दक्षिण और मध्य जनपदोंमें विभिन्न स्थानोंपर रातभर छापेमारीके पश्चात ये कार्यवाही की । ‘एसआईए’का कुछ ही समय पूर्व गठन किया गया है । ‘एजेंसी’को आतङ्कवाद तथा ‘अलगाववाद’से जुडे अपराधोंकी जांचका उत्तरदायित्व सौंपा गया है ।
     अधिकारियोंने बताया कि ‘एसआईए’की जांचके मध्य आतङ्की संगठनकी ‘स्लीपर सेल’के लिए कार्य कर रहे १० लोगोंका अभिज्ञान (पहचान) किया गया । उनमेंसे कोई भी एक-दूसरेकी गतिविधियोंसे अवगत नहीं था । वे सीधे ‘जैश-ए-मोहम्मद’के शीर्ष आतङ्कवादियोंसे निर्देश ले रहे थे । एक अधिकारीने बताया कि इस ‘मॉड्यूल’के (बडी संरचनाकी छोटी परन्तु स्वतन्त्र इकाईके) लोग इस प्रकारसे कार्य कर रहे थे कि यदि एक सदस्य पकडा भी जाए तो समूहका रहस्योद्घाटन न हो । इस ‘मॉड्यूल’का निरन्तर निरीक्षणके माध्यमसे पता लगाया गया था । जिनको बन्दी बनाया गया है, वे युवाओंकी ‘भर्ती’, धनका प्रबन्ध  करने और दक्षिण तथा मध्य कश्मीरमें अस्त्र-शस्त्र पहुंचानेमें सम्मिलित थे ।
     १४ फरवरी २०१९ को जम्मू-कश्मीरके पुलवामामें हुए आतङ्की आक्रमणमें ‘जैश-ए-मोहम्मद’का हाथ था । इसके पश्चात भारतीय सेनाने पाकिस्तानमें आतङ्कवादियोंके ठिकानेपर ‘एयर स्ट्राइक’की थी । इसमें ३५० से अधिक आतङ्की मारे गए थे ।
        आतङ्की संगठनोंके ‘स्लीपर सेल’ समूचे भारतमें फैले हुए है और समस्या यह है कि इनको पकडना गुप्तचर अभिकरणोंके लिए भी ‘टेढी खीर’ है; क्योंकि इन्हें पाकिस्तानसे सहायता मिलती है; अतः पाकिस्तानका नाश ही अब इस समस्याका समधान है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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