अहमदाबाद २००८ ‘सीरियल बम विस्फोट’ प्रकरणमें न्यायालयने ४९ मेंसे ३८ दोषियोंको फांसीका दण्ड सुनाया


१८ फरवरी, २०२२
       गुजरातके अहमदाबादमें वर्ष २००८ में  सतत‘बम’ धमाकोंके प्रकरणमें शुक्रवारको न्यायालयने महत्त्वपूर्ण निर्णय देते हुए, ४९ मेंसे ३८ दोषियोंको फांसीका दण्ड दिया है; जबकि ११ दोषियोंको आजीवन कारावासका दण्ड दिया गया है । विशेष बात यह है कि देशमें प्रथम बार इतनी बडी संख्यामें ‘फांसी’का दण्ड दिया जा रहा है । १३ वर्ष चले इस प्रकरणमें लम्बी सुनवाईके मध्य शासकीय अधिवक्ताओंने ११०० साक्षियोंके (गवाहोंके) वक्तव्य प्रविष्ट किए थे । वर्ष २००८ में हुए अहमदाबाद ‘बम’ धमाकोंमें ५६ लोग मारे गए थे ।
        दण्डित सभी अपराधी मुसलमान हैं, जिसे देखकर अब इस असत्यका खण्डन हो जाता है कि ‘आतंकीका कोई धर्म नहीं होता !’ अब सभीको जितनी शीघ्र हो सके, मृत्युदण्ड दे दिया जाना चाहिए; किन्तु सामान्यजनको भी लग रहा है कि ये और इनके समर्थक भारतीय न्यायव्यवस्थाकी चूकोंका लाभ लेकर अपने दण्डको टलवाते जाएंगे, जो दुःखद है । अतः न्यायव्यवस्थामें परिवर्तन हेतु हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना अनिवार्य है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


सूचना: समाचार / आलेखमें उद्धृत स्रोत यूआरऍल केवल समाचार / लेख प्रकाशित होनेकी तारीखपर वैध हो सकता है। उनमेंसे ज्यादातर एक दिनसे कुछ महीने पश्चात अमान्य हो सकते हैं जब कोई URL काम करनेमें विफल रहता है, तो आप स्रोत वेबसाइटके शीर्ष स्तरपर जा सकते हैं और समाचार / लेखकी खोज कर सकते हैं।

अस्वीकरण: प्रकाशित समाचार / लेख विभिन्न स्रोतोंसे एकत्र किए जाते हैं और समाचार / आलेखकी जिम्मेदारी स्रोतपर ही निर्भर होते हैं। वैदिक उपासना पीठ या इसकी वेबसाइट किसी भी तरहसे जुड़ी नहीं है और न ही यहां प्रस्तुत समाचार / लेख सामग्रीके लिए जिम्मेदार है। इस लेखमें व्यक्त राय लेखक लेखकोंकी राय है लेखकद्वारा दी गई सूचना, तथ्यों या राय, वैदिक उपासना पीठके विचारोंको प्रतिबिंबित नहीं करती है, इसके लिए वैदिक उपासना पीठ जिम्मेदार या उत्तरदायी नहीं है। लेखक इस लेखमें किसी भी जानकारीकी सटीकता, पूर्णता, उपयुक्तता और वैधताके लिए उत्तरदायी है।

विडियो

© 2021. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution