‘मौलानाओं’को १५००० पारिश्रमिक और आंगनवाडी चाकरोंके लिए ‘पैसा’ नहीं, केजरीवालके घरके बाहर १७ दिवससे प्रदर्शन, आप कार्यकर्ताओंपर छेडछाडका आरोप


१८ फरवरी, २०२२
      देशकी राजधानी देहलीमें मुख्यमन्त्री अरविंद केजरीवालके आवाससे मात्र १ किलोमीटरकी दूरीपर आंगनवाडी चाकर प्रदर्शन कर रही हैं । यह प्रदर्शन गत १७ दिवससे चल रहा है । आरोप है कि इन्हें दासोंकी भांति कार्य कराया जाता है और तीन-तीन माहतक पारिश्रमिक नहीं दिया जाता है । इन महिलाओंकी मांग है कि उनका पारिश्रमिक बढाया जाए और पुराने शेष पारिश्रमिकका भी भुगतान किया जाए । बता दें कि देहलीमें इस समय लगभग २२ सहस्र आंगनवाडीमें कार्यरत महिलाएं हैं ।
      आंगनवाडी चाकर देहलीके मुख्यमन्त्री अरविंद केजरीवाल और उनकी नीतियोंका चुनावी राज्यों पंजाब व गोवामें भी विरोध कर रही हैं । इनका कहना है कि एक ओर देहलीके मुख्यमन्त्री महिला सशक्तीकरणकी बात करते हैं और दूसरी ओर देहलीकी महिलाएं गत १७ दिवसोंसे सडकपर बैठकर अपना अधिकार मांग रही हैं, जिनका स्वर मुख्यमन्त्री और उनके शासनके कानोंतक नहीं पहुंच रहा है ।
      महिलाओंका आरोप है कि देहलीके मुख्यमन्त्री पंजाब जाकर आंगनवाडी महिलाओंको लेकर असत्य बोल रहे हैं । २०१७ के पश्चातसे अभीतक एक ‘पैसा’ देहली शासनने आंगनवाडी महिलाओंका अपने मनसे नहीं बढाया । इसके लिए भी उन्हें धरना देना पडा था, जिसके पश्चात इनके पारिश्रमिकमें वृद्धि की गई । अभी आंगनवाडी कार्यकर्ताओंको ९,६७८ रुपए और सहायिकाओंको ४,८३९ रुपया मिलते हैं ।
      वर्तमानमें अरविंद केजरीवाल भारतीय राजनीतिके ‘मीर जाफर’ हैं, जो भारतीय संस्कृति और हिन्दुओंके लिए कर्करोगकी भांति हैं, जो अकर्मण्य मौलानाओंको तो सतत धन दे रहे हैं; किन्तु परिश्रम करनेवाली महिलाओंको नहीं ! कर्तव्यपालन न करनेके कारण केन्द्र शासनको चाहिए कि इन्हें पदच्युत करे और राष्ट्रपति शासन लगाकर, पीडिताओंको उनके पारिश्रमिकका भुगतान करे ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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