श्राइनमें शिवलिंग, उसे दरगाह बता ‘उर्स’ मनाने जुट गए मुसलमान, शिव भक्तोंपर पथराव, कर्नाटकके कलबुर्गीका प्रकरण, १६५ पर प्राथमिकी


३ मार्च, २०२२
     कर्नाटकके कलबुर्गी जनपदके आलंदमें एक धर्म स्थलको लेकर साम्रदायिक तनावका समाचार है । यहां एक धर्मस्थलके भीतर शिवलिंग होनेके चलते हिन्दू समाजके लोग शिवरात्रिके दिनको (१ मार्चको) वहां भजन और पूजाके लिए एकत्रित हुए थे । इसी दिन इस स्थानको ‘लाडले मशक दरगाह’ बतानेवाला मुसलमान समुदाय, यहां ‘उर्स’ मनानेके लिए एकत्रित हुआ था । इसी मध्य विवाद होनेके चलते दोनों पक्ष कुछ घण्टोंके लिए आमने-सामने आ गए थे । इस प्रकरणमें ‘पुलिस’ने अबतक दोनों समुदायोंके १६५ लोगोंपर अभियोग (केस) प्रविष्ट किया है ।
     हिन्दू संगठनोंके अनुसार, धर्मस्थल पूर्वमें शिव मन्दिर था । कालान्तरमें वहांपर ‘इस्लामी’ शक्तियोंने ‘दरगाह’ बना दी थी । यद्यपि मुसलमान पक्ष उस ‘दरगाह’को प्राचीन बता रहे हैं । प्रत्येक वर्ष महाशिवरात्रिपर वहां गणाभिषेक कार्यक्रम होता है । ‘दरगाह’के भीतर ही मन्दिर है, जिसमें यह शिवलिंग उपस्थित है । मंगलवारको हुई घटनाके पश्चात श्रीराम सेनाके प्रमुख प्रमोद मुतालिक, हिन्दू नेता चैत्रा कुन्दपुरा और सन्त सिद्धलिंगा स्वामीके कलबुर्गीमें घुसनेपर रोक लगा दी गई है । प्रमोद मुतालिकको शाहाबाद ‘पुलिस’ने जनपदमें घुसते समय रोक लिया है ।
      ‘मीडिया’ प्रतिवेदनके अनुसार, तनावके मध्य मुसलमान पक्षने ‘पुलिस’ और प्रशासनिक अधिकारियोंकी गाडियोंपर पथराव किया । ‘डिप्टी कमिश्नर’के वाहनको अत्यधिक क्षतिग्रस्त कर दिया गया । वे जैसे-तैसे सुरक्षित बाहर निकाले गए । उत्तरमें हिन्दू संगठनोंने भी पत्थर फेंके ।
        जिस मन्दिरको ‘दरगाह’ बताए जा रहा है, वह अत्यन्त प्राचीन शिव मन्दिर है; परन्तु अतिक्रमणवाली नीतिके कारण, ये जिहादी दशकोंसे हिन्दुओंके पवित्र स्थलोंपर अपना अधिकार जताते आए है । इसका प्रत्यक्ष उदाहरण अयोध्याका श्रीराम मन्दिर है, जिसपर मुगलोंने बाबरी ढांचा बनाकर, उसपर अवैध अधिकार जताया था । ऐसा ही देशके सहस्रों स्थानोंपर किया गया है । आलंदके मन्दिर सहित सभी मन्दिरोंकी मुक्ति अब आवश्यक है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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